Jain philosophy of karma | कर्म-सिद्धांत

भारतीय अध्यात्म और धार्मिक परम्पराओ में कर्म का सिद्धांत अत्यंत सुद्र्ण रूप में स्थापित है। यदपि भारत में ईश्वरवाद को मानने वाले ईश्वर द्वारा भाग्य निर्धारित करने के साथ साथ कर्म को भी सामानांतर मानते है। कर्मवाद जैन…

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Nature of karma | कर्म की प्रकृति

कर्म का रूप लेने वाले भौतिक कण हो सकते हैं। इन्हे उनकी प्रकृति (Nature of karma) के अनुसार, समयावधि परिणाम की तीव्रता और मात्रा के चार कोणों से देखा जाता है। कर्म परमाणु की प्रकृति और मात्रा, मन…

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One-Sidedness Vs Many-sidedness

कई अर्थो में यह सही भी है, किन्तु अनेकांतवाद को एकान्तवाद का मात्र विपरीत शब्द (One-Sidedness Vs Many-sidedness) मान लेना पूर्ण रूप से सही नहीं है। स्याद्वाद और अनेकांतवाद को एक दूसरे का पर्याय भी माना जाता है।…

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Debrief the Syadvada Theory | स्यादवाद

जैन परंपरा में स्याद्वाद (Syadvada) अथवा अनेकांतवाद (Many-Sidedness) का प्रमुख स्थान है। यदि कहा जाये की जैन धर्म के मूल सिद्धांतो का उदय अनेकांतवाद के गर्भ से ही हुआ है, तो किंचित भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस सिद्धांत…

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Debate on Syadvada | स्यादवाद दोष परिहार

स्याद्गाद का क्‍या अर्थ है व उसका दर्शन के क्षेत्र में कितना महत्त्व है, यह दर्शाने के लिये इस पर आने वाले कुछ आरोपों का निराकरण (Debate on Syadvada) करना चाहते हैं। स्याद्वाद के वास्तविक अर्थ से अपरिचित…

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View about Realism | यथार्थवाद के मत

यह स्पष्ट ही है, कि यथार्थवाद (Realism), आदर्शवाद (Idealism) की तरह जड़ तत्त्व का अपलाप नहीं करता। चार्वाक जैसे कुछ यथार्थवादी दर्शन ऐसे तो मिल सकते हैं, जो स्वतंत्र चेतन तत्त्व न मानते हों। किन्तु ऐसा कोई भी…

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Idea of Idealism philosophy | आदर्शवाद

कुछ लोग यह समभते है, कि आदर्शवाद (Idealism) वह सिद्धान्त है, जो स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले संसार को यथार्थ न समझ कर उसके मूल्यांकन या स्वरूप-निर्णय में कुछ कमी कर देता है। संसार का स्वरूप जैसा…

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Indian philosophy trends | भारतीय दर्शन

आश्चर्य, जिज्ञासा और संशयादि कारण जिनसे दर्शन का प्रादुर्भाव होता है, मुख्यरूप से पाश्च्यात परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब हम यह देखने का प्रयत्न करेंगे, कि भारतीय परम्परा इस विषय में क्या मानती है? सामान्य रूप से…

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Vision of Darshan | दर्शन का स्वरुप

जिस प्रकार धर्म का स्वरूप का वर्णन कठिन है, उतना ही मुश्किल दर्शन ( Darshan ) के स्वरुप को समझाना है। साधारणतः आँखों को दृष्टि अथवा विज़न ( vision ) कहते है। जिसका प्रयोग हम इस जगत को…

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Region of vigyan | विज्ञान का क्षेत्र

विज्ञान ( vigyan ) के दो प्रयोजन होते हैं। एक ओर तो यह इच्छा रहती है, कि अपने क्षेत्र में जितना जाना जा सके उतना जान लिया जाय। दूसरी ओर यह प्रयत्न रहता है, कि जो कुछ जान…

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