24 Teerthankar | चौबीस तीर्थंकर

प्रत्येक उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल में 24-24 तीर्थंकर (24 Teerthankar) होते हैं। भरत क्षेत्र में प्रत्येक अवसर्पिणी और उत्तसर्पिणी के कर्म-काल में 24-24 तीर्थकर होते हैं। वैसे तो अभी तक अनन्त काल (अवसर्पिणी व उत्सर्पिणी) बीत चुके हैं…

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Know about Jainism | जैन धर्म

भारतवर्ष की संस्कृति एवं विरासत की नींव के मुख्य आधार यहाँ के अलग-अलग धर्म एवं जातियां हैं। जिस प्रकार से भारत में आपको सभी धर्म आपस में घुले-मिले मिलेंगे वैसा संसार में कहीं नहीं है। भारत के प्रमुख…

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Indian philosophy trends | भारतीय दर्शन

आश्चर्य, जिज्ञासा और संशयादि कारण जिनसे दर्शन का प्रादुर्भाव होता है, मुख्यरूप से पाश्च्यात परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब हम यह देखने का प्रयत्न करेंगे, कि भारतीय परम्परा इस विषय में क्या मानती है? सामान्य रूप से…

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Philosophy Love of Wisdom | फिलोसोफी

अँग्रेजी शब्द ‘फिलोसोफी’ ( Philosophy ) जो कि दर्शन का पर्यायवाची है, ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘फिलोस’ (Philos) और ‘सोफिया’ (Sofia) से मिल कर बना हैं। फिलोस का अर्थ होता है, प्रेम और सोफिया का अर्थ बुद्धि…

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Vision of Darshan | दर्शन का स्वरुप

जिस प्रकार धर्म का स्वरूप का वर्णन कठिन है, उतना ही मुश्किल दर्शन ( Darshan ) के स्वरुप को समझाना है। साधारणतः आँखों को दृष्टि अथवा विज़न ( vision ) कहते है। जिसका प्रयोग हम इस जगत को…

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Region of vigyan | विज्ञान का क्षेत्र

विज्ञान ( vigyan ) के दो प्रयोजन होते हैं। एक ओर तो यह इच्छा रहती है, कि अपने क्षेत्र में जितना जाना जा सके उतना जान लिया जाय। दूसरी ओर यह प्रयत्न रहता है, कि जो कुछ जान…

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Understanding of Dharma | धर्म के अर्थ

धर्म, दर्शन और विज्ञान ( Dharma, Darshan and Vigyan ) परस्पर सम्बद्ध तो हैं ही। अपितु किसी न किसी रूप में एक दूसरे के पूरक भी हैं। यह कहना भी ठीक है, कि इन द्रष्टियो के मार्ग भिन्न-भिन्न…

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Pitru Paksha importance | पितृपक्ष महत्व 

श्राद्ध  एक संस्कृत शब्द है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है, कोई भी कार्य या कोई भी दान जो पूरी ईमानदारी और पूर्ण विश्वास के साथ किसी को समर्पित किया जाता है।  हिंदू धर्म में, यह एक पवित्र अनुष्ठान…

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Asana Bandhas and Mudra | आसन बन्ध मुद्रा

योग के आठों अंगों का अपना विशिष्ट महत्त्व है, और वे साधक को अपने से अगले अंग के सुयोग्य बनाते हैं। यम और नियम तो भूमिकात्मक अंग हैं, किन्तु शेष छ: अंग तो योग से प्रत्यक्ष और अविभिन्‍न…

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Dharna Dhyana Samadhi | धारणा ध्यान समाधि

आसनों से रोग नष्ट होते हैं, तथा शारीरिक सामर्थ्य उत्पन्न होती है। प्राणायाम से समस्त पाप नष्ट होते हैं। शरीर का शोधन होता है। प्रत्याहार से मन के विकार नष्ट होते एवं पात्रता उत्पन्न होती है। धारणा (dharna)…

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