भारतीय त्योहारों की एक सबसे बड़ी खासियत यह होती है, कि प्रत्येक त्यौहार के साथ उससे जुड़ा कोई न कोई दूसरा उत्सव अवश्य मनाया जाता है। 

जैसे दिवाली की मुख्य रात्रि के लक्ष्मी पूजन से पहले धनतेरस एवं नरक चतुर्दशी तथा तत्पश्चात भाई दूज (Bhai Dooj) का का त्यौहार मनाया जाता है। 

वैसे तो भाई दूज का त्यौहार होली के बाद भी मनाया जाता है, किन्तु दिवाली (Deewali ) के उपरांत मनाया जाने वाली भाई दूज का महत्व अधिक है। 

तो चलिए भारतीय उत्सवों की श्रृंखला में भाई दूज से जुडी कहानियों एवं इस की तैयारी तथा महत्व को जानने का प्रयास करते हैं।

Bhai Dooj Meaning | भाई दूज का अर्थ 

पूरे संसार में भाई बहन से अधिक गहरा रिश्ता कोई दूसरा नहीं हो सकता, क्योंकि यही वह रिश्ता है जिसमें दोनों एक दुसरे के लिए अपने प्राण न्योछावर करने के लिए भी तैयार रहते है। 

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Bhai Dooj Meaning | भाई दूज का अर्थ 

 भाई से ज़्यादा बहन की रक्षा एवं सरहाना शायद ही कोई दूसरा करता हो ,वैसे ही बहन भी अपने भाई को अपने हर सुख-दुःख का साथी मानती है। 

बहन ही होती है जो भाई को माँ बाप की डांट से बचाती है, उसको सबसे छुपकर उसकी शैतानियों में सहायता करती है। 

भाई-बहनों के बीच की भावनाओं एवं प्यार को समझना मुश्किल है। भाई दूज या राखी जैसे  विशेष दिन या अवसर होते हैं, जो भाई – बहन के बीच प्यार को मजबूत करने के लिए समर्पित होते हैं।

भैया दूज एक ऐसा अवसर है जो  भाई-बहनों  के मध्य  शाश्वत प्रेम को परिभाषित कर सकता है। बहन अपने भाई के लिए उपवास रखती हैं 

यह अद्भुत त्योहार एक महत्वपूर्ण अवसर है जहां बहनें अपने प्यारे भाई की लंबी उम्र, कल्याण एवं समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।

यह त्यौहार  दिवाली त्योहार के दो दिनों के बाद आता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन होता है जो अक्टूबर और नवंबर के बीच पड़ता है।

गणेश उत्सव (ganesh chaturthi), दुर्गा पूजा (Durga Puja), नवरात्री (navratri) और गरबा (garba) की भी चमक धमक देखने लायक होती है। अधिक जानने के लिए उपरोक्त लिंक पर क्लीक करे एवम सम्पूर्ण विवरण प्राप्त करे।

Beginning and Importance | भाई दूज की शुरुआत एवं महत्व 

भाई दूज का त्यौहार भारत, नेपाल एवं अन्य देशों के हिंदुओं के बीच विक्रम संवत हिंदू के कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष  की द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है।

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Beginning and Importance | भाई दूज की शुरुआत एवं महत्व 

इस त्यौहार के साथ ही दिवाली के पांच दिन के रौशनी के महोत्सव का समापन होता है। भारत के दक्षिणी भाग में इसे यम द्वितीया के नाम से जाना जाता है। 

भाई दूज के त्योहार का एक शाब्दिक अर्थ जुड़ा हुआ है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है- “भाई” एवं  “दूज”, अमावस्या के बाद का दूसरा दिन जो नए चन्द्रमा का समय शुरू होता है। 

भारत के त्योहारों में सबसे रंगोंभरा त्यौहार है। होली जिसमे भारत की रंगबिरंगी छठा देखते ही बनती है। होली उत्सव को अधिक गहराई से जानने के लिए Holi अवश्य पढ़े।

होली के सामान ही पति पत्नी के प्रेम के त्यौहार करवा चौथ को भी जानने के लिये प्यार भरा करवा चौथ (karva chauth) पढ़े।

Bhai Doj Story | भाई दूज की कथा 

भारत में मनाये जाने वाले प्रत्येक त्योहार के पीछे की कहानी यहाँ की संस्कृति के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इस कारण इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है। 

अधिकांश भारतीय त्योहार विशिष्ट पात्रों एवं  व्यक्तित्वों से जुड़े होते हैं, जो जनता को त्योहार के वास्तविक महत्व को समझने और जानने में मदद करते हैं। 

सभी महत्वपूर्ण भारतीय त्योहारों की तरह, भाई दूज से भी जुड़ी एक कहानी है जो इस त्यौहार के महत्व को समझती है। 

पीढ़ियों से, भाई दूज की कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी या तो मुंह से बोलकर या संग्रहीत शास्त्रों के माध्यम से एक से दूसरे तक पहुँचती है। 

इस शुभ दिन को मनाने से संबंधित कुछ हिंदू पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक किवदंती के अनुसार नरकासुर का वध करने के बाद भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे।

उनकी बहन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया एवं  फूलों तथा मिठाइयों के साथ  इस अवसर को वास्तव में विशेष बना दिया। 

सुभद्रा ने अपने भाई कृष्ण के माथे पर  “तिलक”  लगाया तभी से  “भाई दूज” का त्यौहार मनाने की शुरुआत हुई। बहने अपने भाइयों को इसी याद में तिलक लगाती हैं। 

एक अन्य हिन्दू कथा मृत्यु के देवता यम एवं  उनकी बहन यमुना की कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसा माना जाता है कि वह अमावस्या के दूसरे दिन यम अपनी प्यारी बहन यमुना लम्बे समय उपरांत मिले थे। 

यमुना ने खुले दिल से अपने भाई का स्वागत किया तथा तिलक लगाया एवं मुहं मीठा कराया, तभी से पूरे देश में इस अवसर को “यमद्विथेय” या “यमद्वितीय” के रूप में मनाया जाने लगा। 

Other Story | अन्य कथा

भाई दूज से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार एक गांव में एक परिवार रहता था जिसमें केवल एक बहन और एक भाई था।

बहन अपने भाई से आयु में बहुत बड़ी थी, इसी कारन जब उसकी शादी हुई  तो भाई बहुत ही कम उम्र का था। इस कारण लड़के को अपनी बहन की शादी के बारे में कुछ भी याद नहीं था।

 किन्ही कारणों से शादी के बाद बहन कभी भी अपनी मां के घर नहीं लौटी। जैसे-जैसे भाई बड़ा हुआ, हर गुजरते साल के साथ उसकी बहन की छवि उसके मन फीकी पड़ने लगी। 

वह अपनी बहन को बहुत याद करता था, खासकर भाई दूज के दिन, क्योंकि वह अपने दोस्तों को उनके माथे पर टीका और मिठाइयों से भरी थाली एवं पकवान खाते  देखता था।

जब  लड़का बड़ा होकर एक सुंदर युवा लड़के में बदल गया, तो उसने अपनी माँ से  कारण पूछा, कि उसकी बहन शादी के बाद अपने माता-पिता के घर क्यों नहीं आयी।

माँ ने उत्तर दिया कि वह इसलिए नहीं आती, क्योंकि इस गाँव और जिस गांव में वह रहती है के बीच एक बड़ा जंगल है तथा बीच में एक बड़ी नदी बहती है। 

नाव से नदी पार करनी पड़ती है एवं जंगली जानवर भी हैं जिससे लोगों में इतना आतंक है कि बहुत से लोग जंगल से यात्रा नहीं करते हैं।

यह सब जानकार बिना सोचे कि उसे कितनी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा, छोटे भाई ने अगले भाई दूज के दिन अपनी बहन से मिलने का फैसला किया।

जाने से पहले माँ ने उसे फिर से खतरों के बारे में याद दिलाया, लेकिन उसने नहीं सुना, बस उससे मिलने जाएगा। बहन से मिलने की इच्छा ने सभी खतरों को उसके मन से निकल दिया। 

जब उसके जाने का समय आया तो उसकी माँ ने उसने उससे कहा, कि वह अपनी बहन से कह दे कि वह अब आ जाए और उसके लिए एक उपयुक्त दुल्हन का चयन करे।

लड़का चल पड़ा और रास्ते में उसे नदी के बढ़ते स्तर का सामना करना पड़ा, जिससे उसके लिए सड़क पार करना असंभव हो गया। 

सांपों का भी खतरा था। लड़के ने नदी से उसे न डूबने का अनुरोध किया और सांपों से कहा कि वे अपनी इकलौती बहन से मिलने के बाद उसे उसकी वापसी यात्रा पर काट सकते हैं। 

सांप मान गया और लड़का आगे बढ़ गया। अब, वह एक पहाड़ पर आया, जो उस पर बड़े पत्थरों के गिरने से शुरू हुआ था, उसने फिर से उसे जाने देने के लिए उससे विनती की। 

पहाड़ भी मान गया, जब लड़का अपनी बहन के गांव के पास था, एक बड़ा बाघ दिखाई दिया तथा उसे खाने के लिए आगे बढ़ा। 

उसने बाघ से भी विनती की और उससे वादा किया कि बाघ उसकी वापसी की यात्रा पर उसे खा सकता है। बाघ भी उसकी बात मान गया। 

बेचारा लड़का अब जान गया था कि अब वोह दिन दूर नहीं जब वह भी अपनी बहन से मिल पायेगा। सभी बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए लड़का अपनी बहन के घर पहुँच ही गया। 

बेचारा लड़का अब जान गया था कि अब वोह दिन दूर नहीं जब वह भी अपनी बहन से मिल पायेगा। सभी बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए लड़का अपनी बहन के घर पहुँच ही गया। 

जब उसने अपनी बहन के  घर में प्रवेश किया, तो देखा कि वह भाई दूज पूजा कर रही थी। इतने दिनों बाद उसे देखकर बहन ने मुस्कुराते हुए भाई का स्वागत किया और उसे गले से लगा लिया। 

बहन तुरंत ही अपने भाई को तिलक लगाया एवं उसके लिए स्वादिष्ट व्यंजन खीर, पूरी, कचौरी और कई अन्य स्वादिष्ट चीजें तैयार करने के बारे में सोचा। 

जब उसका पति काम के बाद आया, तो दोनों ने युवक के साथ एक सुखद एवं यादगार समय व्यतीत किया, जिससे वह खुशी से भर गया।

जल्द ही लड़के के बहन के घर रहने के दिन बीतते गए, तथा  भाई का अपनी बहन और जीजा से विदा लेने का समय आ गया। 

वापस लौटने से पहले, भाई ने अपनी बहन को पूरी घटना सुनाई और उसे बताया कि उसके दिन गिने जा रहे हैं और वह जल्द ही मरने वाला है। 

यह सब बातें जानकार बहन चौंक गई, फिर  उसने भाई की घर वापसी की यात्रा के लिए उसके साथ जाने का फैसला किया। 

उसने गुप्त रूप से बाघ के लिए कुछ मांस, सांप के लिए कुछ दूध, पहाड़ के लिए चांदी और सोने के फूल और नदी के लिए कुछ रोली और चावल साथ रख लिए।

जल्द ही वे अपने वापसी के रास्ते पर थे तथा सबसे पहले बाघ भाई को खाने के लिए सामने आया । बहन ने उसे मांस का टुकड़ा दिया तो वह अपने रास्ते चला गया। 

उसके पश्चात् वह पहाड़ रस्ते में आया, जो उसके भाई पर गिरना चाहता था। उसने जल्दी से सोने और चांदी के फूलों से पूजा की और पर्वत राज इससे बहुत प्रसन्न हुआ तथा उन पर गिरना बंद कर दिया। 

उसके बाद साँप की बारी आई, तो बहन ने उसे दूध पिलाया गया, और वह भी तृप्त होकर चला गया। इस प्रकार बहन ने शुरुआती बाधाओं को दूर कर लिया और भाई के साथ यात्रा करने लगी। 

वे अब नदी के पास पहुँचे और जैसी कि उम्मीद थी, वह ऊपर की और उठने लगी। लेकिन बहन ने रोली एवं  चावल से पूजा करके उसे भी वश में कर लिया जिससे नदी नीचे चली गई।

दोनों भाई-बहन जंगल के खतरों से बचकर बहुत खुश थे और घर पहुँचने के लिए बेताब थे। बहन अब थक गयी थी एवं उसे बहुत प्यास लगने लगी थी। 

थोड़ी दूर पर बहन ने कुछ मज़दूरों को काम करते देखा तो उसने उनसे अपने भाई एवं अपने  लिए थोड़ा पानी माँगा। 

उन मज़दूरों ने उसे पानी दिया तथा उसे आगाह किया कि उसके भाई की मृत्यु का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। 

तब बहन ने उनसे इसका उपाय पूछा, तो एक बूढी महिला ने उस कहा, कि जब तक उसके भाई का विवाह न हो जाये वह उसको कोसती रहे। 

बहन अपने भाई को जल्द शादी करने को बाध्य करे तथा सभी अनुष्ठान नियमानुसार पूरे करे, तभी उसके भाई की जान बच सकती है। 

इसलिए जब बहन पानी लेकर अपने भाई के पास पहुंची तो उसको कोसने लगी,इस बात से भाई बहुत अचंभित हुआ, किन्तु बहन लगातार अपने भाई को भला बुरा कहती रही। 

जल्द दोनों घर पहुँच गए किन्तु बहन का भाई को कोसना तब भी जारी रहा। माँ के आलावा गांव वाले भी बहन के इस व्यवहार से अचंभित थे। लेकिन किसी ने भी उसे कुछ नहीं कहा क्योंकि वह लम्बे समय बाद वापस लौटी थी। 

जल्द ही, भाई की शादी एक खूबसूरत लड़की से तय हो गई। फिर भी बहन किसी न किसी बहाने से अपने भाई को अशब्द बोलती एवं कोसती रहती थी।

इसी कारण से परिवार एवं गॉव में हर कोई चाहता था कि शादी जल्द से जल्द हो जाए तथा बहन को वापस उसके गांव भेज दिया जाए। 

विवाह के दिन जो भी रिवाज़ करने के लिए उस मज़दूर महिला ने करने को बोला था। इसलिए बहन ने बोला कि उसको सेहरा बांधा। 

जब उसे सेहरा बांधा तो सेहरे की लड़ में सांप निकला। बहन ने ज़ोर दिया, कि भाई की बारात पीछे के दरवाज़े से निकाली जाये। सामने के दरवाज़े पर कोई सजावट भी न की जाये। 

बारात शुरू होने वाली थी तो बहन सो गई थी। उसकी बातों को अनसुना करते हुए सब लोगों ने सामने के बरामदे से बारात शुरू हुई। 

जब सभी लोग सामने के दरवाज़े पर थे, तो बरामदे की छत सभी लोगों पर गिर गयी बड़ी मुश्किल से बचाया। जब फेरों का समय आ गया, तो बहन फिर सो गई। 

जैसे ही फेरे का पहला चक्कर पूरा हुआ, वह लड़का बुरी शक्तियों के कारण बेहोश होकर गिर पड़ा, जो उसे ले जाने के लिए आयी थी। 

शोर सुनकर बहन जाग गई और उन आत्माओं  को कोसते हुए आंगन में आ गई। गालियां सुनकर और उसकी धधकती आंखों को देखकर बुरी आत्माएं भाग गई। 

अब वह समय आ गया था जब बहन और भाई  एक दूसरे को खीर खिलाएं । उन्होंने बहन को पहला निवाला दिया, तो उसमें सुई निकली जिसे बहन ने अपने पास रख लिया। 

जैसे- तैसे शादी की सारी रस्में पूरी हुई, तो सभी लोग खुश हुए तथा जल्द से जल्द बहन के उसके घर विदा करना चाहते थे। 

तब बहन ने सबको उन मज़दूरों द्वारा की गयी भविष्यवाणी के बारे में बताया साथ ही अपने व्यवहार के पीछे के कारण भी बताया। सभी लोगों ने बहन का धन्यवाद किया। 

Bhai Dooj Pooja | भाई -दूज पूजन विधि एवं सामग्री  

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Bhai Dooj Pooja | भाई -दूज पूजन विधि एवं सामग्री  

भाई दूज की पूजा की विधि एवं सामग्री बहुत ही सरल एवं सुलभ है, क्योंकि यह त्यौहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है इसलिए इसमें कोई विशेष सामग्री या विधि नहीं है। फिर भी इसके लिए आपको कुछ चीज़े लगती हैं जैसे –

  • एक लकड़ी की चौकी (एक कम लकड़ी का मंच)
  • सफेद रंगोली पाउडर।
  • कपड़े का एक टुकड़ा।
  • टीका लगाने के लिए रोली या कुमकुम या चंदन।
  • एक आरती थाली।
  • पीतल का दीपक।
  • दीया जलाने के लिए घी या तेल।
  • कपास की बाती।
  • फल,फूल एवं मिष्ठान 

सबसे पहले बहन सुबह उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत होकर अपने भाई की लम्बी आयु के लिए उपवास रखे तथा शाम होने पर चंद्र उदय होने पर उसकी पूजा करे। 

इसके पश्चात् भाई एक लकड़ी की चौकी पर जिसे कपडे सेढंका  गया हो बैठे,भाई अपने सर पर कोई वस्त्र या रुमाल रखे। 

उसके बाद बहन भाई को टीका एवं अक्षत लगाए तथा उसकी नज़र उतरे एवं आरती करे। बहन इस दौरान भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना ईश्वर से मांगे। 

उसके बाद भाई बहन को अपनी क्षमता एवं श्रद्धा के अनुसार उपहार प्रदान करे। बहन भी पूजा क समय भाई को नारियल एवं रूमाल भेंट करे। 

उपरोक्त विधि के समय भाई बहन को उसकी रक्षा करने एवं उसकी भावनाओं को समझने का वचन दे। 

उपरोक्त विधि-विधान से यदि आप भी भाई दूज का त्यौहार मनाएंगे तो आप का भी अपने भाई से प्रेम हमेशा बना रहेगा। 

विश्वास करिये दिवाली के जगमगाते दीपों की रौशनी से आपका घर आंगन भी जगमगाने लगेगा। पूर्वजो की आत्मा की प्रसन्नता के लिए भारत में मनाये जाने वाले पर्व को जानने के लिये पितृ पक्ष (Pitru Paksha) पर जाये।

भारत में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) के दिन भगवान् कृष्ण के भक्ति में डूब कर दही हांड़ी का उत्सव मनाता है।

भादो माह में ही मनाये जाने वाले भारत के एक और भाई बहन के प्यार में डूबे प्रसिद्द त्यौहार रक्षा बंधन (Raksha Bandhan ) को भी पढ़े।

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