आधुनिक दुनिया के सात अजूबों में से सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत है, ताजमहल (Taj mahal)। सफ़ेद संगमरमर के इस अजूबे को प्रेम के प्रतिक के रूप में संसार में जाना जाता है। 

हममें से अधिकतर लोग इस सफ़ेद संगमरमर के नगीने के निर्माण से जुडी सिर्फ एक ही सबसे प्रसिद्ध कहानी के विषय में जानते हैं, कि इसको मुग़ल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम के बेपनाह प्रेम में बनवाया था। 

सदियों से ताजमहल को प्रेम एवं समर्पण के प्रतीक के रूप में पूजनीय माना जाता रहा है। आज भी यह शाश्वत प्रेम की निशानी नव युगलो के लिये प्रेरणा स्रोत है।

यह मुगल वास्तुकला के सबसे प्रतिष्ठित एवं प्रसिद्ध उदाहरणों में से एक है। यह सुंदर मकबरा भव्य, हवादार बगीचों से घिरा हुआ है। 

ताजमहल को स्पष्ट रूप से सभी भव्य दृश्यों के प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया था। यह न केवल शाहजहाँ के अपनी पत्नी के प्रति प्रेम का प्रतीक है, बल्कि उसकी शक्ति एवं  मुगल साम्राज्य की सर्वोच्चता का भी प्रतीक है।

यह दुनिया की सबसे सफल निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इसके निर्माण के लगभग चार शताब्दियों के बाद भी, ताजमहल दुनिया भर में अपनी सुंदरता एवं दृश्य प्रभाव के लिए पहचाना जाता है।

यह आध्यात्मिक एवं सांसारिक शक्ति दोनों का प्रतिनिधित्व करने वाली  प्रतीकात्मकता से प्रभावित है। इसके मोहपाश में खींचकर लाखों लोग हर वर्ष इसको देखने आते हैं। 

इसकी इतनी प्रसिद्धि होने के बाद भी लोगों को इसके विषय में पूरी जानकारी प्राप्त नहीं है। इसके निर्माण एवं वास्तुकला से जुड़े रहस्य अभी भी अनसुलझे हैं। 

इसके विषय में रुडयार्ड किपलिंग ने ठीक ही कहा है, “ऐसा लगता है, जैसे कि सभी शुद्ध, सभी पवित्र चीजें अपना दुःख प्रकट कर रही है।”

इसे देखकर किसी को भी इसके विषय में उत्सुकता एवं रहस्मयकारी अनुभूती हो सकती है। इससे जुड़े कई रहस्य आज तक अनसुलझे हैं। 

Visual Illusion of Taj Mahal | असाधारण दृष्टि भ्रम 

ताजमहल अपनी सुंदरता एवं असाधारण दृश्य प्रभाव के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। जो भी व्यक्ति इस इमारत को देखता है, वो इसकी संरचना के भ्रम से बच नहीं पाता है। 

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Visual Illusion of Taj Mahal | असाधारण दृष्टि भ्रम 

इसके निर्माणकर्ता वास्तुकला में अनुपात के माध्यम से आंख का धोखा निर्मित करने में पूरी तरह उस्ताद थे।

जब आप पहली बार भव्य द्वार के पास पहुंचते हैं। तो स्मारक अविश्वसनीय रूप से करीब तथा बड़ा दिखाई देता है। लेकिन जैसे-जैसे आप गेट के करीब जाते हैं, मुख्य इमारत छोटी होती जाती है।

जैसे-जैसे आप इसके करीब पहुंचने  लगते हैं, ऐसा लगता है कि स्मारक अपने आकार में सिकुड़ता जा रहा है। आपकी उम्मीद के परे यह अपने असली आकार में आने लगता है। 

एक अन्य दृष्टि भ्र्म जो आपको इस भव्य ईमारत को देखकर होता है, वो इसकी विशाल मीनारों से जुड़ा है। इसकी मीनारें जो मुख्य इमारत के चार कोनों पर स्थित है, देखने पर आपको सीधी  लगती हैं। 

किन्तु वास्तव में यह मीनारें सीधी न होकर थोड़ा बाहर की ओर झुकी हुई हैं। इनका यही झुकाव इनके एवं इमारत के मध्य संतुलन बनता है, जिसकी वजह से यह सीधी दिखती हैं। 

निर्माणकर्ता ने उनका यह झुकाव इमारत को किसी भी प्रकार के प्राकृतिक आपदा में मुख्य इमारत को नुकसान से बचने के उद्देश्य से भी किया है। 

इस झुकाव की वजह से यदि किसी भी कारणवश मीनार गिरती हैं, तो वह मुख्य गुम्बद या इमारत पर न गिर कर बाहर की और गिरेंगी जिससे ताजमहल की मुख्य इमारत सुरक्षित रहेगी। 

symmetries vs delusion | अस्पष्ट समरूपता

जब हमारी पहली नज़र ताजमहल पर साक्षात् या उसकी किसी तस्वीर पर पड़ती है, तब पहली नज़र में ही समझ आ जाता है, कि यह ईमारत समरूपता का प्रतीक है। 

इसका केंद्रीय गुंबद चार छोटे गुंबदों तथा चार मीनारों से घिरा हुआ है, एवं  मुख्य परिसर के प्रत्येक छोर पर लाल बलुआ पत्थर की इमारत एक दूसरे को प्रतिबिंबित करती हैं।

ताजमहल में बनाये गए पानी के ताल एवं नहरें भी इमारत को प्रतिबिंबित करके समरूपता का एहसास करने का प्रयास करती देखी जा सकती हैं। 

किन्तु आपको जानकर हैरानी होगी कि ताजमहल की यह समरूपता वास्तु सिद्धांत के विपरीत तथा अस्पष्ट है। निर्माणकर्ता ने प्रतिबिंबित करने वाली संरचनाओं के द्वारा यह समरूपता निर्मित की है। 

जब आप ताजमहल में प्रवेश करते हैं तथा उस कमरे में आते हैं, जहाँ शाहजहाँ एवं  मुमताज़ महल की कब्रें स्थित हैं ( प्रतिरूपी कब्रें ) तो आप पाते हैं, कि मुमताज महल की कब्र उस कमरे के केंद्र में स्थित है। 

वहीं शाहजहां की कब्र मुमताज महल की कब्र के बगल में है एवं आकार में छोटी है, जिससे समरूपता का सामंजस्य बना रह सके। 

पूरे स्मारक में आप सामंजस्य एवं संतुलन का प्रयास करती हुई संरचनाएं देख सकते हैं, ताजमहल की समरूपता अपने आप में एक अपवाद है। 

ऐसे ही भारत के एक और अद्भुत स्थान शांगरिला ( Shangri-La) के रहस्यों के बारे में पढ़े। कहा जाता है, चीन ने इसी स्थान को पाने के लिए भारत पर हमला किया था।

Wooden foundation | लकड़ी की नीव 

भव्य ताजमहल को जब आप देखते हो तो इसकी सुंदरता एवं इसकी स्थापत्य कला आपको मोहित कर देती है। किन्तु क्या आपने सोचा की प्रेम का प्रतीक यह बेमिसाल स्मारक सैंकड़ो सालों से कैसे सही सलामत है। 

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Wooden foundation | लकड़ी की नीव 

इसके निर्माण में न केवल इसकी सुंदरता एवं समरूपता का ध्यान रखा गया है, बल्कि यह स्मारक सालों साल तक बनवाने वाले के प्रेम का प्रदर्शन कर सके इसके लिए इसकी मज़बूती का भी ध्यान रखा गया है। 

इसकी विशाल संरचना हल्केपन एवं भारीपन के प्रबंधन एवं सामंजस्य का अध्भुत मेल है।

ताजमहल जैसी विशाल ईमारत  की योजना बनाते समय उसके मिर्माणकर्ताओं को जिस बात का सबसे पहले ध्यान रखना पड़ा होगा वो था उस स्मारक का भार और उसका संतुलन।

 उसकी भार की गणना ने ही इस बात को निर्धारित किया की इसकी नीव को कितना मज़बूत बनाना होगा,ताकि वह इसके वज़न को वहन कर सके। 

इस स्मारक के मुख्य गुम्बद का भार ही 12000 टन है। इतने अधिक वजन को संभालने के लिए इसकी नींव को गहरा एवं पत्थर की चिनाई तथा लकड़ी से बनाया गया है। 

ताजमहल की नीव के विषय में यह बात पूरी तरह सही है, कि इसके अत्यधिक वजन को सहने के लिए इसकी नीव में लकड़ी के शहतीरों का उपयोग किया गया है। 

लकड़ी की नींव इतने लंबे समय तक सही सलामत रह सकी, क्योकि स्मारक यमुना नदी के तट पर बनाया गया है तथा इसकी वजह से लकड़ी की नींव एक तरफ से हमेशा पानी में डूबी रहती है।  

पानी लकड़ी को सूखने,सड़ने या टूटने से बचाता है, साथ ही वजन को सँभालने में भी लकड़ी का प्रयोग नीव में करना ताजमहल के लम्बे समय तक मज़बूती से टिके रहने में सहायक सिद्ध रहा। 

Empty Tomb | खाली कब्रें या सेंटोस 

ताजमहल एक भव्य ऐतिहासिक स्मारक है। सफेद संगमरमर की विशेषता के साथ ही मूल रूप से कीमती पत्थरों से जड़ा हुआ है। इसे बेहतरीन नक्काशी से शानदार ढंग से सजाया गया है। 

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Empty Tomb | खाली कब्रें या सेंटोस 

यह इमारत सुंदरता एवं कलात्मक महत्वाकांक्षा का चमत्कारिक संयोजन है। इसके आसपास के उद्यान समान रूप से असाधारण तथा देखने में आकर्षक हैं। 

खूबसूरती एवं प्रेम की अद्भुत मिसाल ताजमहल को देखने एवं शाहजहां तथा मुमताज के प्रेम को महसूस करने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों लोग उनकी समाधि के दर्शन को आते है। 

किन्तु क्या आप में से कोई इस बात से परिचित है, कि मुख्य गुम्बद के कमरे मे मौजूद कब्रे असली नहीं है, बल्कि प्रतीकात्मक कब्रें हैं। 

स्मारक में मुमताज एवं शाहजहां के असली ताबूत बगीचे में नीचे एक गुप्त, शांत कमरे में स्थित है। मुस्लिम परंपरा के अनुसार कब्र को ताज़े फूलों से सजाया जा सकता है, किन्तु नकली सजावट से नहीं। 

स्मारक में ऊपर बनी संगमरमर की शानदार नक्काशी वाली कब्रें राजा की शानो शौकत की प्रतीक है तथा निचले तल में बनी सादा मिट्टी की कब्रें मृतकों को शांत एवं सम्मानीय निंद्रा प्रदान करती हैं। 

Carving | नक्काशी में छिपे निर्माणकर्ता के हस्ताक्षर 

ताजमहल की इमारत को बेहतरीन नक्काशी से सजाया गया है। पूरे परिसर में जगह जगह पुष्प पैटर्न, ज्यामितीय डिजाइन एवं  नाजुक पत्थर तथा टाइल वर्क की एक विस्तृत विविधता देखने को मिलती है। 

इसके भव्य प्रवेश द्वारों पर कुरान की आयतें लिखी गयी है, जो मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना है। इन्ही लेखों के बीच इसे बनाने वाले ने अपने हस्ताक्षर किये हैं। 

प्रमाण बताते हैं, कि इन सुलेखों को अमानत खान द्वारा स्मारक पर उकेरा गया था। उदाहरण के लिए प्रवेश द्वार पर एक आयत लिखी है -” हे मृतक आत्मा आप यहाँ शांति से रहें और क़यामत के दिन खुदा के हुज़ूर में पहुंचे “

इमारत पर लिखे सुलेख बताते  है, वह इतने अविश्वसनीय है, कि पहली नज़र में ऐसा लग सकता है, कि इसे हाथ से चित्रित किया गया है।  

लेकिन यह वास्तव में जड़े हुए पत्थर की एक तकनीक है। अमानत खान ने लेटरिंग को डिजाइन किया और फिर उन कारीगरों का निरीक्षण किया जिन्होंने उन टुकड़ों को काटकर उनमे लगाया। 

उस समय इस तरह की सुलेखन को अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण माना जाता था, क्योंकि इसे ईश्वर के शब्दों को प्रतिलेखित करने के रूप में देखा जाता था।

Unfinished central dome | अपूर्ण केंद्रीय गुम्बद 

ताजमहल को लोग उसकी सुंदरता, समरूपता एवं पूर्णता के लिए देखने आते हैं। जब कोई पहली बार ताज को निहारता है, तो प्रेम की यह इमारत उसको हर प्रकार से पूर्ण लगती है। 

किन्तु ताज की समरूपता एवं पूर्णता असल में सही नहीं है। ताजमहल का मुख्य आकर्षण उसका मुख्य गुम्बद है। पहली नज़र में यह पूर्ण लगता है, लेकिन यह अधूरा है। 

मुख्य ढांचे से इस गुम्बद की समरूपता में 5.5% का  अंतर है, जो पहली बार में देखने पर समझ नहीं आता। लेकिन जब आप कई बार एवं गौर से इसका अवलोकन करते हो तब यह अंतर आपको नज़र आता है। 

ताजमहल के मुख्य गुंबद की कमियों को लेकर बहुत सारी बातें कही जाती हैं। जैसे ऐसी छोटी-छोटी कमियां जानबूझकर छोड़ी गयी है, ताकि ईश्वर की बराबरी न की जाये। 

क्योंकि इस्लामिक मान्यता के अनुसार ईश्वर की बराबरी इंसान कभी नहीं कर सकता है, इसी वजह से जानबूझकर निर्माण में निर्माताओं ने कमियां रखी थी। 

Hollow structure | शिखर या आवर्त असली नहीं हैं 

इसके डिजाइन के सबसे रोमांचक पहलुओं में से एक यह है, कि देखने में ऐसा लगता है जैसे ताजमहल की ऊंचाई आसमान को छू रही है। 

इसकी ऊँची मीनारें एवं गुंबद देखकर ऐसा लगता है, जैसे इनके निर्माण में हज़ारों टन पत्थर का प्रयोग किया गया हो, लेकिन ऐसा सच में नहीं है। 

मीनारें एवं गुम्बद भीतर से खोखले हैं। उनको ऊपरी तौर पर संगमरमर के पत्थर के टुकड़ों एवं सजावटी पत्थरों से सजाया गया है। 

यह सारी बातें देखने वालों को ऐसा एहसास कराती हैं, जैसे यह सब बहुत वज़नदार पत्थरों के प्रयोग से निर्मित किये गए है। 

ताजमहल के मुख्य गुम्बद के ऊपर लगा शिखर असल में ठोस सोने से बना था जिसकी ऊंचाई 11 गज़ ( ३३ फ़ीट) थी। 

आधिकारिक ताजमहल की वेबसाइट द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार 19 वीं शताब्दी की शुरुआत में इस आवर्त को काँसे की प्रतिकृती से बदल दिया गया था। 

हालांकि इस विषय में यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गयी है, कि ऐसा किस कारणवश किया गया था। इसको लूट लिया गया या यह किसी दुर्घटना की वजह से टूट गया। 

एक किदवंती के अनुसार कहा जाता है, कि एक समय में अंग्रेज़ों ने ताजमहल को कई टुकड़ों में काटकर इंग्लैंड ले जाने का प्रयास किया था जिसके फलस्वरूप यह शिखर बदला गया। 

Change in color | रंग बदलने की कहानी 

17वीं शताब्दी में ताजमहल जैसी ईमारत का निर्माण करना मुग़ल डिजाइन, निर्माण कला एवं वास्तुकला तथा कलात्मकता की एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। 

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Change in color | रंग बदलने की कहानी 

मकबरे के हर इंच में सुंदर नगीने जड़े हुए हैं। इसके मीनारों एवं दरवाज़ों पर उल्लेखित विवरणों से पता चलता है, कि इसका निर्माण अत्यंत सावधानी पूर्वक किया गया था। 

इसका निर्माण इस प्रकार किया गया है जिससे देखने वालों की आँखों को भ्रमित किया जा सके। निर्माण में नगीनों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है, कि ताजमहल का रंग  दिन के हर पहर में अलग दिखाई दे। 

Sound Echo | सटीक प्रतिध्वनि व्यवस्था 

मुख्य गुम्बद का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है, कि कक्ष में आवाज़ पूरी सटीकता से गूँज सके।

इसमें आने वाले आगंतुक मकबरे के मुख्य गुंबद के अंदर अद्वितीय तरीके से ध्वनि गूँज का अनुभव कर सकते हैं।

ताजमहल के मुख्य गुम्बद में जब आप आवाज़ करते है, तो यह पूरे कमरे में घूमकर प्रतिध्वनित होती है, जिससे एक सटीक गूँज का अनुभव आपको मिलता है। 

इसकी उपरोक्त विशेषताएं ही हैं, जो इस इमारत को संसार के आठ अजूबों में शामिल करवाती हैं। इसके निर्माण की बारीकियां आप पेली नज़र में नहीं जान सकते। 

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