भारतीय संस्कृति (Indian culture) के निर्माण के पीछे हमारे देश का सदियों का  इतिहास एवं इसकी वैभवशाली विरासत है, जो इसे दुनिया में सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक बनाती है।

भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का इतिहास 5000 साल से भी अधिक पुराना है,जिसको अभी तक हमारे देश के लोगों ने संभालकर एवं सहेज कर रखा हुआ है। 

समस्त संसार में  भारत के रीति-रिवाजों एवं  परंपराओं को बहुत ही विविध तथा अद्वितीय माना जाता हैं। इसी कारण से  यहाँ के लोगो को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है 

हम सभी हमारे पूर्वजों की बनाई हुई परंपराओं का पालन करते है। किन्तु इस बात पर विचार नहीं करते, कि इनके बनने के पीछे का रहस्य क्या है। 

प्रत्येक रीति- रिवाज़ के पीछे उस समय के लोगों के विचार एवं माहौल भी जुड़े हैं। वो जिस समय काल में जिस प्रकार से निवास करते थे, उसी के अनुसार उन्होंने अपने रीति-रिवाज़ों को बनाया। 

इसी कारण समय के साथ भारतीय परम्परा एवं संस्कृति में बदलाव देखे गए है। समय के साथ-साथ लोगों के विश्वास एवं मान्यताओं में परिवर्तन ही हमारी संस्कृति को विविधता प्रदान करता है। 

भारतीय परंपरा एवं संस्कृति के निर्माण स्तम्भ के रूप में कुछ ख़ास चीज़े काम करती है, जो इसको आधार प्रदान करने में अपना योगदान देती हैं। 

Religion based Indian culture | धर्म आधारित संस्कृति    

भारत की पहचान हिंदू एवं बौद्ध धर्म के जन्मस्थान के रूप में की जाती है, जो दुनिया में तीसरा और चौथा सबसे बड़ा धर्म है। भारत की लगभग 84 प्रतिशत आबादी की पहचान हिंदू के रूप में है। 

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Religion based Indian culture | धर्म आधारित संस्कृति    

भारत में हिन्दू धर्म मानने वाले भी कई जाति, वर्ण एवं सम्प्रदायों में बंटे हुए हैं। इनकी अपनी अलग-अलग मान्यताएं,संस्कृति एवं रीति-रिवाज़ हैं जो इस देश की धार्मिक संस्कृति को विस्तार देने में अपना प्रमुख योगदान देती हैं। 

मुख्यता हिंदू  धर्म चार प्रमुख वर्णों में बंटा है, क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र एवं ब्राह्मण। प्रत्येक वर्ण हिन्दू धर्म से जुड़े होने के पश्चात् भी एक दुसरे से बिलकुल अलग होता है। 

इसके अलावा अन्य उप जटिया भी पायी जाती है, जो इस धर्म को सबसे प्राचीन एवं भव्य रूप प्रदान करने के साथी एक जटिलता भी दे जाता है। 

यहाँ लगभग 13 प्रतिशत भारतीय मुस्लिम भी निवास करते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े इस्लामी देशों में से एक बनाता है। ईसाई और सिख आबादी का एक छोटा प्रतिशत भी यहाँ निवास करता  हैं। 

इन धर्मों के अलग-अलग त्यौहार,संस्कार आदि मिलकर यहाँ की संस्कृति को भव्यता प्रदान करते है। एक और जहाँ भारतीय धर्म कुछ जटिलता लिए दिखते हैं। वहीं दूसरी ओर यह विभिन्नता में एकता का प्रतीक भी है। 

भारतीय दर्शनशास्त्र (Indian philosophy) और इसके प्रभाव से जन्मे भारतीय धर्मो ( Dharma ) को जाने।

Indian Languages | भारतीय भाषाएँ

भारत एक बहुत ही विविध देश है, जिसमें 1.3 अरब से अधिक लोग निवास करते हैं, जो इसे चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बनाता है। 

भारत के अलग -अलग प्रांतों में रहने वाले लोग विभिन्न भाषाओं में संवाद करते हैं। यहाँ के लिए एक प्रसिद्ध कहावत है – ‘’ कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी ‘’ . 

भाषा की यही विविधता भारत की संस्कृति को दूसरी सभ्यताओं एवं संस्कृतियों से अलग बनाती है। यहाँ के लोग अपने जीवन में अपनी भाषा को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। 

भारत में आधिकारिक उद्देश्यों में संवाद के लिए हिंदी,उर्दू एवं  अंग्रेजी का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है तथा इनको आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।

 भारत में 28 राज्य एवं  आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं। भारत का संविधान आधिकारिक तौर पर 23 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता देता है।

हालांकि, भारत में 400 से अधिक भाषाएँ एवं बोलियाँ मानी जाती है। इसके अलावा कितनी भाषाएं और है, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाती है। उनके विषय में अभी भी ज्ञात नहीं हैं।

एक सर्वे के अनुसार भारत में पिछले कुछ वर्षों में बहुत कम जीवित वक्ताओं के कारण लगभग 190 प्राचीन भारतीय भाषाएँ लुप्तप्राय हो गई हैं।

भारत में हजारों परंपराएं एवं संस्कृति मौजूद हैं, एवं उनमें से कुछ बाहरी लोगों को बल्कि उत्सुक बनाती हैं। लेकिन भारतीय समाज और संस्कृति की जड़ हमेशा अच्छी तरह से व्यवहार करने वाली, विनम्र, दूसरों का सम्मान करने और एक साथ प्रगति करने की रही है।

भारत के लोगों की दूसरों के साथ जल्द घुल मिल जाने की प्रवृति यहाँ के समृद्ध भाषा के पीछे का एक मुख्य स्रोत रहा है। 

भारत में रहने वाले बहुत से लोग देवनागरी लिपि में लिखते पढ़ते हैं। वास्तव में, यह एक गलत धारणा है, कि भारत में अधिकांश लोग हिंदी बोलते हैं।

हालांकि भारत में बहुत से लोग हिंदी बोलते हैं। 56 प्रतिशत भारतीय निवासी हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, तेलुगु तमिल, पंजाबी, गुजराती एवं  उर्दू जैसी अन्य भारतीय भाषाओँ का प्रयोग अपने दैनिक जीवन में करते हैं। 

भारत की प्राचीन पाण्डुलिपि भाषा संस्कृत है, जो  एक प्राचीन इंडो-यूरोपीय भाषा के रूप में उत्तरी भारत में आई है। इस भाषा की शुरुआत कैसे हुई यह भाषाविदों के बीच बहस का विषय रहा है। 

यह भाषा अंग्रेजी, फ्रेंच, फारसी तथा रूसी भाषाओं के साथ कई समानताएं साझा करती है। संस्कृत के इन अन्य भाषाओँ से जुड़ाव के कारण यह अत्यंत विस्तृत भाषा बन पायी। 

भारत में भाषाओं की विविधता ही इसकी संस्कृति को दूसरों से अलग करने एवं विस्तार देने का काम करती है। भले ही दूसरे  लोग इस देश को भाषाओँ की खिचड़ी का देश कहें। 

Population of India | भारत की जनसंख्या

भारतीय संस्कृति का दूसरा सबसे प्रमुख स्तम्भ यहाँ की जनसँख्या भी है। भारत संसार में सबसे ज़्यादा आबादी के मामले में दूसरा स्थान रखता है। 

यहाँ की जनसंख्या की अधिकता ही अनेकों भाषाओं एवं धर्म संस्कृति के विस्तार का प्रमुख कारण सिद्ध हुई है।

भारत की लगभग 35 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जिसकी अनुमानित वार्षिक बढ़ोतरी दर 2 प्रतिशत से कुछ अधिक है, जो हर साल शहरों में जाती है।

भारतीय ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के अपने सांस्कृतिक तथा धार्मिक रीति-रिवाज़ होते है। यह आबादी सबसे अधिक परम्परा वादी होती है। 

वही शहरी आबादी के लोग अपने व्यस्त एवं आधुनिक जीवनशैली के कारण अपनी पुराणी परम्पराओं एवं रीति-रिवाज़ों में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करते रहते हैं। 

जीवनशैली की यही विविधता भारतीय संस्कृति को एक विस्तृत एवं विशाल भव्यता प्रदान कर देती है। भले ही गांव के लोग हों या शहर के सभी अपनी पारंपरिक जड़ों से जुड़े रहना पसंद करते है । 

Festivals and celebration | उत्सव एवं समारोह

भारत में भी बड़ी संख्या में त्यौहार मनाये  जाते हैं, जिसका मुख्य कारण यहाँ के विविध धर्म एवं  समूह  है। एक ओर जहाँ मुसलमान ईद मनाते हैं, ईसाई क्रिसमस और गुड फ्राइडे मनाते है। 

सिखों समुदाय बैसाखी (फसल की कटाई), लोहड़ी, गुरु पर्व ( दस गुरुओं के जन्म दिन ) इत्यादि मनाये जाते हैं। हिंदुओं में दिवाली, होली, मकर संक्रांति जैसे प्रमुख त्यौहार मनाये जाते है। 

जैन धर्म अनुयायी  महावीर जयंती, दस लक्षण पर्व आदि भव्य रूप से मानते हैं। वही बौद्ध धर्म को मानने वाले बुद्ध पूर्णिमा मनाते  हैं। यदि देखा जाए तो हर दिन भारत में एक त्यौहार या उत्सव मनाया जाता है। 

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहाँ निवास करने वाली अलग-अलग जातियां एवं धर्म रोज़ ही कोई न कोई त्यौहार मानते हैं।  

भारत में नव वर्ष का त्यौहार देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समय पर एक अनूठी शैली के साथ मनाया जाता है। 

जैसे उगादी, बिहू, गुड़ी पड़वा, पुथंडु, वैसाखी, पोहेला बोइशाख, विशु तथा  विशुवा संक्रांति भारत के विभिन्न हिस्सों में नए साल के त्योहार के रूप में विक्रम संवत अनुसार मनाया जाता है ।

भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, 2.780 करोड़ से अधिक ईसाइयों के साथ भारत में ईसाई धर्म तीसरा सबसे बड़ा धर्म है।  

2.780 करोड़ से अधिक ईसाइयों में से 1.7 करोड़ रोमन कैथोलिक हैं, भारत कई ईसाई त्योहारों का घर है। देश क्रिसमस और गुड फ्राइडे को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाता है। 

क्षेत्रीय एवं  सामुदायिक मेले भी भारत में एक आम त्योहार की तरह मनाये जाते हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान का पुष्कर मेला दुनिया के सबसे बड़े मवेशियों और पशुओं के मेलों में से एक है।

भारत में मनाये जाने वाले त्योहार यहाँ की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ने में अपना विशेष योगदान देकर इसे और भी समृद्ध बनाते हैं। 

Family values | पारिवारिक मुल्य 

भारतीय संस्कृति के विकास एवं भव्यता के पीछे यहाँ की पारिवारिक संरचना का महत्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि यहाँ लोग अपने परिवार को लेकर अत्यंत संवेदनशील होते हैं। 

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Family values | पारिवारिक मुल्य 

पीढ़ियों से, भारत में संयुक्त परिवार प्रणाली की प्रचलित परंपरा रही है। यह तब होता है, जब एक परिवार के विस्तारित सदस्य – माता-पिता, बच्चे, बच्चों के जीवनसाथी और उनकी संतान आदि – एक साथ रहते हैं। 

आमतौर पर संयुक्त परिवार प्रणाली में परिवार का  सबसे बुज़ुर्ग  पुरुष सदस्य परिवार का मुखिया होता है। समस्त परिवारी सदस्य उसके आदेशानुसार कार्य करते हैं। 

समय के साथ अधिकांश मेट्रो शहरों में वर्तमान अर्थव्यवस्था, जीवन शैली और रहने की लागत अधिक होती जा रही है। 

आज की शहरी  जनसंख्या संयुक्त परिवार मॉडल को पीछे छोड़ रही है, और एकल परिवार मॉडल को अपना रही है।

पहले के समय में संयुक्त परिवार में रहना लोगों में सुरक्षा एवं सहानुभूति की भावना को बढ़ावा देता था। किन्तु आज के बदलते दौर में अपनी आजीविका के लिए लोगों को एकल परिवार में रहना पसंद है। 

किन्तु आज भी भारत के ग्रामीण परिवार संयुक्त परिवार व्यवस्था में विश्वास करते है, और अपनी पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग दे रहे हैं। 

Arrange Marriage | विवाह संस्कार

भारत में अरेंज मैरिज की अवधारणा के प्रमाण वैदिक काल से ही मिलते है। आज भी अधिकांश भारतीयों की शादी उनके माता-पिता एवं परिवार के अन्य सम्मानित सदस्यों द्वारा की जाती है। 

भारत में परिवार द्वारा विवाह सम्बन्ध निर्धारित किये जाने के बाद भी महिलाओं को अपनी पसंद का वर ढूंढने की पूरी आज़ादी प्राचीन काल से दी जाती रही है। 

जिसका लिखित प्रमाण हमको प्राचीन वेदों एवं शास्त्रों में भी मिलता है। इस प्रथा को स्वयंवर के नाम से जाना जाता है। 

विवाह संस्कार में सभी पारिवारिक सदस्यों द्वारा एक साथ मिलकर निभाई जाने वाली रस्में और गीत संगीत मिलकर इस संस्कार को एक उत्सव का रूप प्रदान करते हैं। 

विवाह बंधन को भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना गया है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। यह परंपरा लोगों को रिश्ते की पवित्रता बनाये रखने के लिए बाध्य करती है। 

शादी को लेकर भारतीय हिन्दू मान्यताये, इतिहास एवं परम्पराओ को जानने के लिये विवाह (vivah ) अवश्य देखे। साथ ही इससे रोमांस से भरपूर त्यौहार करवा चौथ (karva chauth) पर भी जाये।

Greetings tradition | अभिवादन या नमस्ते की परंपरा 

नमस्ते कहकर सबका अभिवादन करना सबसे लोकप्रिय भारतीय रीति-रिवाजों में से एक है। समय के साथ अब यह केवल भारतीय क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। 

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Greetings tradition | अभिवादन या नमस्ते की परंपरा 

अपितु  जहाँ तक भारतीय धर्म एवं संस्कृति का प्रचार प्रसार हुआ है वहां अभिवादन का यह तरीका  देखा जा सकता है। नमस्ते या नमस्कार  प्राचीन हिंदू शास्त्रों, वेदों में वर्णित पारंपरिक अभिवादन के पांच रूपों में से एक है। 

यह ‘मैं आपको नमन करता हूं’ में अनुवाद करता हूं, या इसके साथ एक दूसरे का अभिवादन करना ‘हमारे दिमाग मिलें’ कहने का एक तरीका है। 

अभिवादन करने वाले की  छाती के सामने मुड़ी हुई हथेलियों द्वारा इंगित किया जाता है, कि मैं दिल से आपका स्वागत या अभिवादन करता हूँ। 

नमः शब्द का अनुवाद ‘ना मा’ (मेरा नहीं) के रूप में भी किया जा सकता है, जो दूसरे की उपस्थिति में अपने अहंकार की कमी को दर्शाता है।

Fasting in Indian culture | उपवास की प्रथा 

उपवास रखना भारत की संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। उपवास आपकी ईमानदारी और संकल्प का प्रतिनिधित्व करने या देवी-देवताओं के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का एक तरीका है।

देश भर में लोग विभिन्न धार्मिक अवसरों के दौरान अपने धार्मिक मतानुसार उपवास रखते हैं। कुछ लोग सप्ताह के अलग-अलग दिनों में उस विशेष दिन से जुड़े किसी विशेष देवता या देवी के पक्ष में उपवास भी रखते हैं। 

उपवास रखने वाले को अत्यंत श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है। उपवास की समाप्ति तथा मान्यता की पूर्ति होने पर उत्सव मनाया जाता है। 

Architecture in Indian culture | वास्तुकला 

भारतीय वास्तुकला में अंतरिक्ष ऊर्जा के  साथ-साथ कई तरह के भाव शामिल हैं, जो लगातार नए विचारों को अवशोषित करते हैं। 

भारतीय  वास्तुशिल्प उत्पादन की एक विकसित श्रृंखला है, जो  पूरे इतिहास में निरंतरता की एक निश्चित मात्रा को बरकरार रखती है।

अधिकांश भारतीय मंदिर पृथ्वी की चुंबकीय तरंग रेखाओं के साथ स्थित हैं, जो उपलब्ध सकारात्मक ऊर्जा को अधिकतम करने में मदद करते हैं। 

मुख्य मूर्ति के नीचे दबी तांबे की प्लेट (जिसे गर्भगृह या मूल स्थान कहा जाता है) इस ऊर्जा को अपने परिवेश में अवशोषित और प्रतिध्वनित करता है। 

भारतीय परंपरा के अनुसार प्रतिदिन मंदिर जाने एवं अपने आराध्य के दर्शन करने से आपको सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है, जिससे आपको हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। 

भारतीय वास्तुकला से सम्बन्धित प्राचीन भारतीय परम्पराओ तथा उनसे जुड़े नियमो को पड़ने के लिए वास्तु परिचय ( vastu ) का अध्ययन करे।

Religious symbols | धार्मिक प्रतीक

भारतीय परंपराओं तथा  शास्त्रों में विभिन्न संकेत एवं प्रतीक हैं जिनके कई अर्थ हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय संदर्भ में स्वास्तिक का प्रयोग एडोल्फ हिटलर या नाजीवाद की ओर इशारा नहीं करता है। 

यह बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश का प्रतीक है। स्वस्तिक की भुजाओं के विभिन्न अर्थ होते हैं। वे चार वेदों, चार नक्षत्रों या मानव खोज के चार प्राथमिक उद्देश्यों को दर्शाते हैं।

भारतीय परंपरा, मान्यताओं का वैकल्पिक प्रतिक योग (yoga) और कुण्डलिनी (kundalini) का रहस्य भी है। जो पुरातन काल से पाश्चात्य संस्कृति से भारत आने वाले दार्शनिको को प्रभावित करता आया है।

अतिथि देवो भवः

भारत में, ‘अतिथि देवो भवः’ कहावत भी अभिन्न है। इसका अर्थ है ‘अतिथि भगवान के समान है’। यह हिंदू धर्मग्रंथों से लिया गया है। 

यह  एक संस्कृत छंद है, जो बाद में ‘हिंदू समाज के लिए आचार संहिता’ का हिस्सा बन गया क्योंकि अतिथि हमेशा भारत की संस्कृति में सर्वोच्च महत्व रखता रहा  है।

Indian Apparel | भारतीय परिधान

भारतीय परिधान भी अन्य देशों की तुलना में आसानी से अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं का भान दूसरों को कराने में सक्षम होते हैं। 

भारतीय महिलाओं को अक्सर ‘साड़ी’ पहने देखा जाता है। साड़ी एक ही कपड़ा है तथा  इसे सिलाई की जरूरत नहीं है। यह बनाने में आसान और पहनने में आरामदायक है, तथा धार्मिक शिष्टाचार का भी पालन करता है। 

यह शुरू में एक हिंदू परंपरा के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन सभी धर्मों में बहुत ही सुंदर ढंग से फैल गया है। यही बात अधिक कार्यात्मक ‘कुर्ता-पायजामा’ और सभी धर्मों के भारतीय पुरुषों के लिए ‘शेरवानी’ के औपचारिक परिधान पर भी लागू होती है।

Dance, Drama, Music, Art | नृत्य, ड्रामा, संगीत एवं कला 

भारत ‘अनेकता में एकता’ की भूमि है, और हमारे नृत्य अलग नहीं हैं। नृत्य के विभिन्न रूप (लोक या शास्त्रीय के रूप में वर्गीकृत) देश के विभिन्न हिस्सों से उत्पन्न होते हैं। 

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Dance, Drama, Music, Art | नृत्य, ड्रामा, संगीत एवं कला 

वे उस विशेष संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने का एक तरीका हैं जिससे वे उत्पन्न होते हैं। भारत में आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य, जिन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य के रूप में वर्गीकृत किया गया है ,जिनका  हिंदू संस्कृत पाठ ‘नाट्यशास्त्र’ में उल्लेख मिलता है।

1 तमिलनाडु से भरतनाट्यम

2 केरल से कथकली

3 उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत से कथक

4 केरल से मोहिनीअट्टम

5 आंध्र प्रदेश से कुचिपुड़ी

6 उड़ीसा से ओडिसी

7 मणिपुरी मणिपुरी

8 असम से सत्रिया 

भारतीय नाटक एवं  रंगमंच का संगीत तथा  नृत्य के साथ एक लंबा इतिहास है। कालिदास के नाटक जैसे शकुंतला और मेघदूत कुछ पुराने नाटक हैं। 

जो भास के नाटकों का अनुसरण करते हैं। केरल का कुटियाट्टम, प्राचीन संस्कृत रंगमंच का एकमात्र जीवित नमूना है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति सामान्य युग की शुरुआत के आसपास हुई थी। 

 इनको  यूनेस्को द्वारा आधिकारिक तौर पर मानवता की मौखिक और अमूर्त विरासत की उत्कृष्ट कृति के रूप में मान्यता प्राप्त है।

प्राचीन समय से संगीत भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। 2000 साल पुराना संस्कृत पाठ नाट्यशास्त्र संगीत वाद्य यंत्रों को वर्गीकृत करने के लिए वर्गीकरण की पांच प्रणालियों का वर्णन करता है।

इनमें से एक प्राचीन भारतीय प्रणाली कंपन के चार प्राथमिक स्रोतों के अनुसार संगीत वाद्य यंत्रों को तार, झिल्ली, झांझ एवं वायु चार समूहों में वर्गीकृत करती है।  

पुरातत्वविदों ने ओडिशा के ऊंचे इलाकों में 3000 साल पुराने, 20 कड़ी वाले बेसाल्ट से बने लिथोफोन जिसे बहुत ही बारीकी से आकार दिया गया है, की खोज भी की है।

भारत के वर्तमान संगीत में धार्मिक, शास्त्रीय, लोक, फिल्मी, रॉक और पॉप संगीत और नृत्य की कई किस्में शामिल हैं। खासकर युवा पीढ़ी के बीच पारंपरिक शास्त्रीय संगीत तथा  नृत्य की मांग  तेजी से घट रही है।

Shastra and Epic | शास्त्र और महाकाव्य

कविताओं, नाटकों, कहानियों और यहां तक ​​कि स्वयं सहायता गाइडों के रूप में लिखे गए महान महाकाव्यों में भारतीय साहित्य का पता लगाया जा सकता है।

सबसे प्रसिद्ध हिंदू महाकाव्य रामायण एवं  महाभारत हैं। वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत संस्कृत में लिखी गई सबसे लंबी कविता है। 

ये दोनों महाकाव्य त्याग, निष्ठा, भक्ति और सत्य के मानवीय मूल्यों को उजागर करने के लिए लिखे गए हैं। दोनों कहानियों का नैतिक बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

Indian Cuisines | भारतीय व्यंजन 

भारतीय भोजन या व्यंजन न केवल भारत की संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं, बल्कि दुनिया भर में भारत की लोकप्रियता के महत्वपूर्ण कारकों में से एक हैं। 

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Indian Cuisines | भारतीय व्यंजन 

खाना पकाने की शैली एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होती है, हालांकि सर्वसम्मति से मसालों एवं जड़ी-बूटियों के व्यापक उपयोग के लिए भारतीय भोजन की एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा है।

नृत्य, धार्मिक प्रथाओं, भाषा और कपड़ों की तरह, आपको पूरे देश में विभिन्न प्रकार के भोजन मिलेंगे। हर क्षेत्र का विशेष व्यंजन अथवा पकवान होता है।

हालांकि, पूरे देश में मुख्य रूप से चावल, गेहूं एवं  बंगाल चना (चना) प्रयोग होते हैं। जबकि शाकाहारी भोजन गुजराती दक्षिण भारतीय और राजस्थानी व्यंजनों का एक अभिन्न अंग है।  

मांसाहारी व्यंजन मुगलई, बंगाली, उत्तर भारतीय और पंजाबी व्यंजनों का एक केंद्रीय हिस्सा हैं। यह भी ध्यान रखना दिलचस्प है, कि कश्मीर जैसे विशिष्ट व्यंजन भी मध्य एशिया, फारस और अफगानिस्तान से विदेशी खाना पकाने की शैलियों से प्रभावित हुए हैं।

हाथों से भोजन ग्रहण करना 

भारत में हाथों से भोजन करने की प्रथा का प्रचलन है,भले ही कई लोगों को हाथ से खाना अच्छा नहीं लगता लेकिन भारतीय अपनी ही तरह से भोज्य पदार्थों का स्वाद लेना पसंद करते हैं । 

इसके कई फायदे हैं उँगलियाँ ऊष्मा ग्राही होने के कारण गर्म भोजन को अंदर डालने पर आपके मुँह को जलने से रोकती हैं। 

खाना खाने से पहले आपको तापमान जांचना होता है। इसके अलावा, जब आप हाथों से भोजन करते हैं, तो आप धीमी गति से भोजन करते हैं। इस प्रकार किया गया भोजन पाचन में सुगम होता है।

परंपरागत रूप से दाहिनी हाथ को खाने के लिए प्रयोग किया जाता है, क्योंकि  बाएं हाथ को गंदा माना जाता है। खाना खाने से पहले अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। 

यह अभ्यास खाने की प्रक्रिया को बहुत स्वच्छ बनाता है। दक्षिण और पूर्वी भारत में हाथों से भोजन करना एक व्यापक प्रथा है। 

लेकिन उत्तर और पश्चिम भारत में यह थोड़ा दुर्लभ है। उत्तर और पश्चिम भारत में लोग चम्मच का इस्तेमाल चम्मच से करते हैं

उपरोक्त सभी बातें मिलकर भारत की संस्कृति को विश्व में अलग जगह प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते है। इन्ही की वजह से भारतीय संस्कृति आदरणीय है। 

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