मानव इतिहास में प्राचीन समय से हम लोग अपने आने वाले भविष्य को जानने और समझने के लिए ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते आये हैं। 

विशेष रूप से जब हम समाज की सबसे ज़रूरी परंपरा विवाह संस्कार की बात करते है, तो भारतीय समाज में ज्योतिष का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

जब विवाह और प्यार ( Pyar ) की बात आती है। तब इस बात का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, कि राशि के आधार पर उन दोनों के बीच सामंजस्य कैसा और कितना रहेगा।

जोड़ों के बीच आपसी प्यार और निबाह को लेकर कुंडलियों का मिलान किया जाता है। जिसके आधार पर यह सुनिश्चित करते है, कि नव विवाहित जोड़े का आने वाला जीवन कैसा रहने वाला है। 

इसके अलावा जीवन के  प्रमुख कार्य की शुरुआत से पहले एक दुसरे की राशियों के बीच होने वाली समरसता को जांचा और परखा जाता है। 

ज्योतिष शास्त्र  को लेकर हाल ही में आई तेजी को इस तथ्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है कि हम अपने बारे में अधिक सीखना और अपनी आत्म-जागरूकता को  कितना बढ़ाना पसंद करने लगे हैं। 

हम जिस रिश्ते को लेकर जितना गंभीर होते है। उतना ही अधिक उस रिश्ते के भविष्य को लेकर भी आशंकित रहते है। 

यही हमारी राशियों के बीच होने वाली समरसता हमको इस आशंका से बाहर निकलने में सहायता प्रदान करती है। 

 इसके लिए आपकी जन्म कुंडली,आपके जन्म के समय ग्रहों की स्थिति इत्यादि आपको बताते है, कि आप दोनों के बीच कैसा रिश्ता रहने वाला है। 

आप दोनों के जन्म के समय की ग्रहों की स्थिति और आपकी राशियों के मूल तत्व काफी हद तक आपके रिश्ते की मज़बूती को प्रभावित करते है। 

यहाँ हम ज्योतिष शास्त्र के आधार पर इन्ही बातों पर गौर करेंगे।

Pyar ki anukulta ko akar dene wale grah

ज्योतिष शास्त्र में इन सभी बातों का ध्यान रखा जाता है, कि आपके और आपके साथी के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति कैसी और किन नक्षत्रों में थी। 

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Credit : Adina Voicu

इन सभी के आधार पर दो व्यक्तियों के मध्य समरसता के गुण की व्याख्या की जाती है। लव अथवा प्रेम और आपकी राशि के बारे में जानने के लिए प्रेम ( Prem ) लिंक पर जाये।

कोई भी ज्योतिष शास्त्र का ज्ञाता आपके जन्म के समय, स्थान और दिनांक के आधार पर आपके जन्म चार्ट या कुंडली का निर्माण करता है। 

Surya aur Pyar | सूर्य

आपकी कुंडली का निर्माण दो प्रमुख ग्रहों के आपके जन्म कि स्थिति के आधार पर किया जाता है, पहला सूर्य और दूसरा चन्द्रमा। 

भारतीय ज्योतिष शास्त्र पद्धति में राशि चक्र और कुंडली की गणना आपके जन्म के समय सूर्य की स्थिति के आधार पर की जाती है। इसीलिए हम सूर्य की बारह राशियों के आधार पर आपकी राशि का निर्धारण करते है।  

प्रत्येक राशि का राशि चक्र की दूसरी राशियों के साथ उनके मूल तत्व के आधार पर एक रिश्ता बनता है जो या तो अत्यंत सामंजस्य पूर्ण होता है, या वह पूरी तरह से एक दुसरे की विरोधी होती हैं। 

राशियों का यही आपसी व्यव्हार आप दोनों के बीच के रिश्ते को भी दर्शाता है। सूर्य आपकी आत्म-छवि, आत्म-सम्मान, पहचान और आप कैसे आत्मविश्वास का अनुभव करते हैं।

सूर्य इसकी देखरेख करता है, और यह आपके जीवन पथ को भी प्रभावित कर सकता है।

Chandra aur Pyar | चंद्र

झिलमिलाते, रहस्यमय चंद्रमा को आपका आंतरिक भावनात्मक परिधि माना जाता है। यह न केवल जीवन में अनुभवों, लोगों और भौतिक वस्तुओं से जुड़ा हुआ है।

जो आपको सुरक्षा की भावना प्रदान करता है बल्कि यह भी प्रभावित करता है कि आप दूसरों के साथ भावनात्मक रूप से कैसे जुड़ते हैं।

इसलिए यह किसी ऐसे व्यक्ति की पहचान करने में बहुत मददगार है। जो आपके मूल्यों को साझा करता है, और इस बात को भी दर्शाता है, कि आप अंतर्ज्ञान और भावना का अनुभव कैसे करते हैं। 

इसलिए जब हम ज्योतिष शास्त्र में जोड़ों की कुंडली का मिलान करते है।  तब उनकी कुंडली में चंद्र की स्थिति का भी ध्यान रखते है, या उसका भी निरिक्षण करते है।  

Shukra aur Pyar | शुक्र

शुक्र ग्रह को किसी भी मानव के जीवन में प्रेम प्राप्ति के लिए उत्तरदायी मन जाता है। इसलिए व्यक्ति के जन्म के समय शुक्र ग्रह की स्थिति क्या थी।

इस बात के आधार पर उसके आने वाले जीवन में प्यार के अवसरों की गणना की जाती है। 

आपकी कुंडली में प्रेम, रोमांस, सुंदरता और धन का ग्रह शुक्र यह बताता है, कि आप एक रिश्ते में सबसे ज्यादा क्या महत्व रखते हैं। 

आप कैसे अपनी प्यार की इच्छा प्रदर्शित करते हैं, आप दूसरों को कैसे आकर्षित करते हैं, और किस तरह से आप आनंद का अनुभव करते हैं। 

यह आपके किसी भी सामाजिक संपर्क और रिश्तों में रोमांटिक व्यवहार को काफी हद तक चित्रित कर सकता है।

आपकी प्रेम भाषा को रंग देता है। इसी आधार पर इस ग्रह को आपकी कुंडली का प्यार में प्रमुख योगदान प्रदान करने वाला ग्रह माना  जाता है। 

Mangal aur Pyar | मंगल

मंगल को क्रिया का ग्रह कहा जाता है। यह जीवन में उन चीजों को प्रभावित करता है, जो आपको ऊर्जा, आपकी ताकत, आपकी आंतरिक आग और हां, आपकी यौन शैली को प्रभावित करती हैं। 

यदि आप चाहते हैं, कि आपका साथी जीवन के उन सभी पहलुओं के संदर्भ में एक ही पृष्ठ पर हो। इसलिए यह निर्धारित करने के लिए मंगल एक प्रमुख ग्रह है।

जो यह बताता और निर्धारित करता है, कि आप किसी और के साथ कितना अच्छा व्यवहार करेंगे।  

मंगल वैसे तो आपके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करता है। लेकिन विशेष रूप से यह आपके विवाहित जीवन या प्रेम जीवन को प्रभावित करता है। 

इसीलिए कुंडली मिलान में मंगल की स्थिति को विशेष रूप से देखा जाता है। 

इसलिए इन सभी प्रमुख ग्रहों की स्थिति और इनके आपसी व्यव्हार के आधार पर ही आपके और आपके साथी के बीच होने वाले व्यव्हार और प्यार का निर्धारण किया जाता है। 

samrasta wale grah | सर्वाधिक आपसी समरसता वाले ग्रह

दो लोगों के बीच आपसी समरसता के परीक्षण के लिए दोनों की जन्म राशियों के बीच की समरसता की विशेष रूप से जाँच परख की जाती है। 

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Credit : Marina Stroganova

आमतौर पर दो लोगों के बीच प्राकृतिक रूप से भी ससंगता देखि जा सकती है। लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में दोनों की जन्म राशियाँ एक दुसरे से विपरीत व्यव्हार करती है।

जिसके कारण से उनके बीच आगे चलकर अनेकों समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। यहाँ हम उन राशियों पर नज़र डालेंगे।

जो एक दुसरे से विशेष ससंगत व्यव्हार करती हैं, और दो लोग जब इन राशियों को अपनी कुंडली में लेकर जन्म लेते है तो उनके बीच समरसता देखने को मिलती है।

राशियों का व्यव्हार उनके मूल तत्व के आधार पर निर्धारित किया जाता है। 

अग्नि तत्व राशियां –  मेष, सिंह, धनु

पृथ्वी तत्व राशियां – वृष, कन्या, मकर

वायु तत्व राशियां –  मिथुन, तुला, कुंभ

जल तत्व राशियां – कर्क, वृश्चिक, मीन

आप उन राशि संकेतों  पर भी विचार कर सकते हैं, जो आपके यौन व्यव्हार को प्रभावित करते हैं। ये संकेत दो अलग-अलग चिह्न होते हैं।

और यह एक संगत तत्व के अंतर्गत आते हैं। अग्नि और वायु दोनों एक दुसरे के साथ सरल व्यव्हार करते हैं, जैसे जल और पृथ्वी। 

samrasta wali rashiya | प्यार की समरसता वाली राशियाँ

मेष राशि – मिथुन, कुंभ

वृषभ राशि – कर्क, मीन

मिथुन राशि – मेष, सिंह

कर्क राशि – वृष, कन्या

सिंह राशि – मिथुन, तुला

कन्या राशि – कर्क, वृश्चिक

तुला राशि – सिंह, धनु

वृश्चिक राशि – कन्या, मकर

धनु राशि – तुला, कुम्भ

मकर राशि – वृश्चिक, मीन

कुम्भ राशि – मेष, धनु

मीन राशि – वृष, मकर

Pratikool Pyar wale grah | प्रतिकूल आपसी प्यार और समरसता वाले ग्रह

जिस तरह से अलग अलग राशियां और ग्रह एक दुसरे के साथ समरसता और ससंगता को साझा करते है। उसी प्रकार कुछ ग्रह और राशियां एक दुसरे के साथ परस्पर विरोधी व्यव्हार भी करते है।

जिसका सीधा असर आपके एक दुसरे के साथ रिश्ते पर भी पड़ता है। राशियों के आपसी सकारात्मक या नकारात्मक व्यवहार का कारण विशेष रूप से आपके सूर्य चिन्ह पर आधारित होता है।

अभी रशिया मिलकर आपकी कुंडली में एक वर्गीकृत ढाँचे के रूप में काम करती है।  लेकिन जब यह वर्गाकार न होकर त्रिकोण के कुंडली में स्थित होते है, तब आपके लिए नकारात्मक व्यवहार करते है। 

इन लक्षणों का सामान्य होना शुरू में आपसी संगतता के लिए तेज़ गति ट्रैक की तरह लग सकता है, लेकिन वर्गों के मामले में, समान ऊर्जा का बहुत अधिक होना भी संघर्ष का कारण बन सकता है। 

यहाँ हम ऐसी ही राशियों और ग्रहों के विषय में बात करेंगे।

मेष राशि – कर्क, मकर

वृषभ राशि – सिंह, कुंभ

मिथुन राशि – कन्या, मीन

कर्क राशि –  मेष, तुला

सिंह राशि – वृश्चिक, वृषभ

कन्या राशि – मिथुन, धनु

तुला राशि – कर्क, मकर

वृश्चिक  राशि – सिंह, कुंभ

धनु राशि – कन्या, मीन

मकर राशि – मेष, तुला

कुम्भ राशि – वृष, वृश्चिक

मीन राशि – मिथुन, धनु

pratikool rashiya | प्रतिकूल संयोजन राशियाँ

यदि आपकी कुंडली में सूर्य या कोई अन्य ग्रह आपके साथी के समान राशि में है, तो वे एक दूसरे की युति कर रहे होते हैं।

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इसी तरह, सूर्य, चंद्रमा, या किसी अन्य ग्रह के संकेत में होने से जो आपके साथी के सीधे विपरीत है, यिन और यांग का मामला बना सकता है, जिसमें आप व्यवस्थित रूप से एक दूसरे को संतुलित कर देते  हैं। 

जो राशियां एक दूसरे के विपरीत व्यवहार करती है वह इस प्रकार से है। 

मेष और तुला

वृषभ और वृश्चिक

मिथुन और धनु

कर्क और मकर

सिंह और कुंभ

कन्या और मीन

Jyotish aur Pyar | ज्योतिष और प्यार

ज्योतिष शास्त्र के द्वारा यह पता लगाया जाता है, कि आपका सूर्य, चंद्रमा, शुक्र और मंगल एक साथी के ग्रहों के साथ कैसे व्यव्हार करते हैं।

आप जीवन में एक दुसरे के साथ कैसे जुड़ते हैं, या टकराते हैं। आपका जन्म चार्ट ये सारी मूल्यवान जानकारी आपको प्रदान करता है। 

ज्योतिष् में कई स्तरों पर आपके और आपके साथी के बीच की ससंगता की जाँच परख की जाती है।

आप यह समझ सकते हैं, कि जन्म कुंडली के कुछ विवरण आपके साथी के साथ कैसे मेल खा सकते हैं, सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं, या संघर्ष कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, मान लें कि उनके 12वें घर में कई ग्रह हैं। जो उन्हें अत्यंत संकोची बनाता है, जबकि आपके पास पहले घर में अधिकांश ग्रह ऐसे हैं, जिसका अर्थ है कि आप प्यार में अत्यंत खुले व्यव्हार और दिल वाले है।  

Conclusion | सारांश

उपरोक्त सभी स्तरों पर आप दोनों की कुंडली के विस्तृत अध्यन के आधार पर ही ज्योतिष शास्त्र में इस बात का खुलासा किया जाता है, कि आपके और आपके साथी का प्यार भरा साथ ( Pyar Bhara Sath ) कैसा होगा।

आपकी कितनी निभेगी और किन मुद्दों पर आप एक दुसरे के विपरीत व्यवहार करेंगे।  

आप दोनों की कुंडली में ग्रहों की स्थिति आपके आने वाले जीवन का सम्पूर्ण विवरण आपको प्रदान करने में सहायक सिद्ध होता है। 

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