यह एक बहुचर्चित योग है, जो सात प्रमुख ग्रहों के राहु और केतु के मध्य एक ओर आ जाने से बनता है। यद्यपि कालसर्प दोष ( Kaal Sarp Dosh ) को लेकर ज्योतिषी एकमत नहीं हैं।

राहु और केतु को सर्प के मुख और पूंछ के सदृश्य माना गया है। अतः यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में सात ग्रह शेष राहु व केतु के बीच एक ही तरफ आ जाएं तो उसका जीवन समरस नहीं रहता हैं।

इसके साथ यह भी सत्य है, कि जातक असाधारण प्रतिभा के स्वामी भी होते है। जिस तरह शनि की साढ़ेसाती जातक से कठिन परिश्रम करवा उसे समुचित मान सम्मान दिलाती है।

उसी प्रकार यदि जातक इस समय का सदुपयोग करे तो संसार में राजयोग का भागी बनता है। नेहरू जी, धीरूभाई अंबानी, सचिन तेंदुलकर इत्यादि कुछ इस दोष के उदाहरण है।

Kaal Sarp Dosh ke Lakshan | कालसर्प दोष के प्रमुख लक्षण

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Kaal Sarp Dosh ke Lakshan
  • बाल्कयाल में किसी भी प्रकार व्याधि का उत्पन्न होना। अर्थात घटना-दुर्घटना, चोट लगना, बीमारी आदि।
  • विद्या अध्ययन में रुकावट होना या पढ़ाई बीच में ही छूट जाना। पढ़ाई में मन नहीं लगना या फिर ऐसी कोई आर्थिक अथवा शारीरिक बाधा जिससे अध्ययन में व्यवधान उत्पन्न हो जाए।
  • विवाह में विलंब भी कालसर्प दोष का ही एक लक्षण है। यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो निश्चित ही किसी विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही इस दोष के चलते वैवाहिक जीवन में तनाव और विवाह के बाद तलाक की स्थिति भी पैदा हो जाती है।
  • एक अन्य लक्षण है, संतान का न होना और यदि संतान हो भी जाए तो उसकी प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है।
  • परिजन तथा सहयोगी से धोखा खाना, खाकसर ऐसे व्यक्ति जिनका आपने कभी भला किया हो।
  • घर में कोई सदस्य यदि लंबे समय से बीमार हो, और वह स्वस्थ नहीं हो पा रहा हो। साथ ही बीमारी का कारण पता नहीं चल रहा है।
  • आए दिन घटना-दुर्घटनाएं होते रहना।
  • रोजगार में दिक्कत या फिर रोजगार हो तो बकरत न होना।
  • इस दोष के चलते घर की महिलाओं को कुछ न कुछ समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं।
  • रोज घर में कलह के चलते पारिवारिक एकता खत्म हो जाना।
  • घर-परिवार मांगकिल कार्यो के दौरान बाधा उत्पन्न होना।
  • यदि परिवार में गर्भपात या अकाल मृत्यु हुई है, तो यह भी कालसर्प दोष का लक्षण है।
  • घर के किसी सदस्य पर प्रेतबाधा का प्रकोप रहना या मानसिक अशांति और चिड़चिड़ापन होना।

जिनके पास कुंडली सम्बंधित जानकारी नहीं है। वह अपने जन्म माह और तिथि से अपना भविष्यफल जानने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जाकर पढ़ सकते है।

जनवरी (January), फरवरी ( February), मार्च (March), अप्रेल (April), मई (May), जून (June ), जुलाई (July), अगस्त (August), सितम्बर (September), अक्टूबर (October ), नवंबर (November ), दिसंबर (December)

Kaal Sarp Dosh ke Prakar | कालसर्प दोष के प्रकार

कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के साथ अन्य ग्रहो के विन्यास के अनुसार कालसर्प दोष को 12 प्रकारो में विभाजित किया गया है।

Anant Kaal Sarp Dosh | अनन्त कालसर्प दोष

जब जन्कमुंडली में राहु लग्न में व केतु सप्तम में हो और उस बीच सारे ग्रह हों तो अनन्त कालसर्प दोष बनता है। इस दोष में जातको के व्यक्तित्व निर्माण में कठिन परिश्रम की जरूरत पड़ती है।

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Anant Kaal Sarp Dosh

उनके विद्‌यार्जन व व्यवसाय के काम बहुत सामान्य ढंग से चलते हैं, और इन क्षेत्रों में थोड़ा भी आगे बढ़ने के लिए जातक को कठिन संघर्षक रना पड़ता है।

मानसिक पीड़ा कभी-कभी उसे घर-गृहस्थी छोड़कर वैरागी जीवन अपनाने के लिए भी उकसाया करती हैं। लाटरी, शेयर व सूद के व्यवसाय में ऐसे जातको की विशेष रुचि रहती हैं, किंतु उसमें भी इन्हें ज्यादा हानि ही होती है।

शारीकिर रूप से उसे अनेक व्याधियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक स्थिति बहुत ही डांवाडोल रहती है। फलस्वरूप मानसिक व्यग्रता वैवाहिक जीवन में भी जहर घोलने लगती है।

जातक को माता-पिता के स्नेह व संपत्ति से भी वंचित रहना पड़ता है। निकट संबंधी भी नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आते।

कई प्रकार के षड़यंत्रों व मुकदमों में फंसे ऐसे जातक की सामाजिक प्रतिष्ठा भी घटती रहती है। उसे बार-बार
अपमानित होना पड़ता है।

लेकिन प्रतिकूलताओं के बावजूद जातक के जीवन में एक ऐसा समय अवश्य आता है, जब चमत्काकिर ढंग से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। वह चमत्कार किसी कोशिश से नहीं, अचाकन घटित होता है।

सम्पूर्ण समस्याओं के बाद भी जरुरत पड़ने पर किसी चीज की इन्हें कमी नहीं रहती है। यह किसी का बुरा नहीं करते हैं।

जो जातक इस दोष से ज्यादा परेशानी महसूस करते हैं। उन्हें निम्नलिखित उपाय कर लाभ उठाना चाहिए।

Anant Kaal Sarp Dosh Upay | अनन्त कालसर्प दोष के उपाय

  • विद्यार्थी सरस्वती जी के बीज मंत्रों का एक वर्ष तक जाप करें और विधिवत उपासना करें।
  • हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें।
  • महामृत्युन्जय मन्त्र का जाप करने से भी अनन्त काल सर्प दोष का शान्ति होता है |
  • मयूर (मोर) पंख रखें ।

Kulik Kaal Sarp Dosh | कुलिक कालसर्प दोष

कुंडली में राहु दूसरे घर में हो और केतु अष्टम स्थान में हो तथा सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में हो तो कुलिक कालसर्प दोष बनता है।

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Kulik Kaal Sarp Dosh

जिससे जातक को अपयश का भी भागी बनना पड़ता है। इस योग की वजह से जातक की पढ़ाई-लिखाई सामान्य गति से चलती है।

वैवाहिक जीवन भी सामान्य रहता है। परंतु आर्थिक परेशानियों की वजह से वैवाहिक जीवन में भी जहर घुल जाता है।

मित्रों द्वारा धोखा, संतान सुख में बाधा और व्यवसाय में संघर्षक भी पीछा नहीं छोड़ते। जातक का स्वभाव भी विकृत हो जाता है।

मानसिक असंतुलन और शारीरिक व्याधियां झेलते-झेलते वह समय से पहले ही बूढ़ा हो जाता है। उत्साह व पराक्रम में निरंतर गिरावट आती जाती है।

कठिन परिश्रमी स्वभाव उसे सफलता के शिखर पर भी पहुंचा देता है। परंतु इस फल को वह पूर्णतय: सुखपूर्वक भोग नहीं पाता है।

ऐसे जातको को इस योग की वजह से होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपायों का अवलंबन लेना चाहिए।

Kulik Kaal Sarp Dosh Upay | कुलिक कालसर्प दोष के उपाय

  • शिक्षा के लिए सरस्वती जी के बीज मंत्रों का जाप करें और विधिवत उपासना करें।
  • नियमित हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें।
  • श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।
  • शनिवार और मंगलवार का व्रत रखें और शनि मंदिर में भगवान शनिदेव कर पूजन करें व तैलाभिषेक करें, इससे तुरंत कार्य सफलता प्राप्त होती है।
  • राहु की दशा आने पर प्रतिदिन एक माला राहु मंत्र का जाप करें और जब जाप की संख्या 8 हजार हो जाये तो राहु की मुख्य समिधा दुर्वा से पूर्णाहुति हवन कराएं और किसी गरीब को उड़द व नीले वस्त्र का दान करें।

Vasuki Kaal Sarp Dosh | वासुकी कालसर्प दोष

राहु तीसरे ग्रह स्थान में और केतु नवम स्थान में साथ ही इस के बीच सारे ग्रह ग्रसित हों, तो वासुकी कालसर्प दोष बनता है।

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Vasuki Kaal Sarp Dosh

जातक भाई-बहनों से भी परेशान रहता है। अन्य पारिवारिक सदस्यों से भी आपसी खींचतान बनी रहती है। रिश्तेदार एवं मित्रगण उसे प्राय: धोखा देते रहते हैं। घर में सुख-शांति का अभाव रहता है।

समय-समय पर व्याधि ग्रसित करती रहती हैं। जिसमें अधिक धन खर्च हो जाने के कारण आर्थिक स्थिति भी असामान्य हो जाती है।

अर्थोपार्जन के लिए जाकत को विशेष संघर्ष करना पड़ता है, फिर भी उसमें सफलता संदिग्ध रहती है। चंद्रमा के पीड़ित होने से जीवन मानकिस रूप से उद्विग्न रहता है।

इस योग के कारण जातक को कानूनी मामलों में विशेष रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। राज्यपक्ष से प्रतिकूलता रहती है।

नौकरी या व्यवसाय आदि के क्षेत्र में निल्रम्बन या नुकसान उठाना पड़ता है। यदि अपने जन्म स्थान से दूर जाकर कार्य करें तो अधिक सफलता मिलती है।

लेकिन सब कुछ बुरा होने के बाद भी जातक अपने जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करता है। विलम्ब से ही सही उत्तम भाग्य का निर्माण भी होता है, और शुभ कार्य सम्पादन हेतु अवसर प्राप्त होते हैं।

Vasuki Kaal Sarp Dosh Upay | वासुकी कालसर्प दोष के उपाय

  • प्रत्येक बुधवार को काले क्‍स्त्रों में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डाकलर, राहु का मंत्र जप कर भिक्षाटन करने वाले को दे दें।
  • यदि दान लेने वाला कोई नहीं मिले तो बहते पानी में उस अन्न को प्रवाहित करें। 72 बुधवार तक करने से अवश्य लाभ मिलता है।
  • महामृत्युंजय मंत्रों का जाप प्रतिदिन एक माला रोज करें, जब तक राहु केतु की दशा-अंर्तदशा रहे और हर शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें और मंगलवार को हनुमान जी को चौला चढ़ायें।

Shankhpal Kaal Sarp Dosh | शंखपाल कालसर्प दोष

राहु चौथे स्थान में और केतु दशम स्थान में हो और इसके बीच सारे ग्रह हो तो शंखपाल कालसर्प दोष बनता है।

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Shankhpal Kaal Sarp Dosh

इससे घर-द्वार, जमीन-जायदाद व चल- अचल संपत्ति संबंधी थोड़ी बहुत कठिनाइयां आती हैं।

जातक को कभी-कभी बेवजह चिंता घेर लेती है तथा विद्या प्राप्ति में भी उसे आंकिश रूप से तकलीफ उठानी पड़ती है। जाकत को माता से कोई न कोई किसी न किसी समय आंकिश रूप में कष्ट रहता है।

सेवको एवं नौकरों की वजह से भी कोई न कोई कष्ट होता ही रहता है। इसमें उन्हें कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है। वैवाहिक जीवन सामान्य होते हुए भी वह कभी-कभी तनावग्रस्त हो जाता है।

चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण समय-समय पर मानसिक संतुलन खोया रहता है। कार्य के क्षेत्रा में भी अनेक विघ्न आते हैं। पर वे सब विघ्न कालान्तर में स्वतः नष्ट हो जाते हैं।

बहुत सारे कामों को एक साथ करने के कारण जातक का कोई भी काम प्राय: पूरा नहीं हो पाता है। इस योग के प्रभाव से आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिस कारण आर्थिक संकट भी उपस्थित हो जाता है।

लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी व्यवसाय, नौकरी तथा राजनीति के क्षेत्र में बहुत सफलताएं प्राप्त होती हैं, एवं सामाजिक पद प्रतिष्ठा भी मित्रती है।

यदि उपरोक्त परेशानी महसूस करते हैं तो निम्नलिखित उपाय करें। अवश्य लाभ प्राप्त होगा।

Shankhpal Kaal Sarp Dosh Upay | शंखपाल कालसर्प दोष के उपाय

  • शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिकपा दें।
  • 86 शनिवार का व्रत करें और राहु, केतु व शनि के साथ हनुमान की आराधना करें। हनुमान जी को मंगलवार को चौला चढ़ायें और शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें
  • नित्य प्रति हनुमान चालीसा पढ़ें और भोजनालय में बैठकर भोजन करें। हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें और पांच मंगलवार का व्रत करते हुए हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला सिंदूर व बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
  • सवा महीने तक जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं और प्रत्येक शनिवार को चींटियों को शक्कर मिश्रित सत्तू बिलों पर डालें।

Padam Kaal Sarp Dosh | पद्म कालसर्प दोष

पंचम राहु व केतु एकदश भाव में तथा इस बीच सारे ग्रह हों तो पद्म कालसर्प दोष बनता है। इसके कारण जातक के विद्याध्ययन में व्यवधान उपस्थित होता है।

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Padam Kaal Sarp Dosh

परंतु कालान्तर में यह व्यवधान समाप्त हो जाता है। उन्हें संतान प्राय: विलंब से प्राप्त होती है, या संतान होने में आंकिश रूप से व्यवधान उपस्थित होता है।

पुत्र संतान की प्राय: चिंता बनी रहती है। स्वास्थ्य भी कभी-कभी असामान्य हो जाता है। इस योग के कारण दाम्पत्य जीवन सामान्य होते हुए भी कभी-कभी तनावपूर्ण हो जाता है।

परिवार में जातक को अपयश मिलने का भय बना रहता है। जातक के मित्रगण स्वार्थी होते हैं और वे सब पतन कराने में सहायक होते हैं।

जातक को तनावग्रस्त जीवन व्यतीत करना पड़ता है। इस योग के प्रभाव से गुप्त शत्रू भी होते हैं। वे सब नुकसान
पहुंचाते हैं।

लाभ मार्ग में भी आंशिक बाधा उत्पन्न होती रहती है एवं चिंता के कारण जीवन संघर्षमय बना रहता है। जातक द्वारा अर्जित सम्पत्ति को प्राय: दूसरे लोग हड़प लेते हैं।

जातक को व्याधियां भी घेर लेती हैं। इलाज में धन खर्च हो जाने के कारण आर्थिक संकट उपस्थित हो जाता है।

वृध्दावस्था को लेकर जातक अधिक चिंतित रहता है एवं मन में संन्यास ग्रहण करनेकी भावना भी जागृत हो जाती है।

लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी एक समय ऐसा आता है, कि जातक आर्थिक इष्टि से बहुत मजबूत होता है, समाज में मान-सम्मान मित्रता है और कारोबार भी ठीक रहता है।

यदि यह जाकत अपना चाल्र-चलन ठीक रखें, मध्यपान न करें और अपने मित्र की सम्पत्ति को न हड़पे तो उपरोक्त कालसर्प का प्रभाव लागू नहीं होते हैं।

Padam Kaal Sarp Dosh Upay | पद्म कालसर्प दोष के उपाय

  • शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिकपा दें।
  • नित्य प्रति हनुमान चालीसा का बार पाठ करें और हर शनिवार को लाल कपड़े में आठ मुट्ठी भिंगोया चना व ग्यारह केले सामने रखकर हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें और उन केलों को बंदरों को खिला दें।
  • प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं और हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली के तेल में घुला सिंदूर चढ़ाएं।
  • श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें। ऐसा करने से समस्त दोषों की शांति हो जाती है।
  • श्रावण के महीने में प्रतिदिन स्नानोपरांत माला ‘नम: शिवाय’ मंत्रा का जप करने के उपरांत शिवजी को बेलपत्र व गाय का दूध तथा गंगाजल चढ़ाएं तथा सोमवार का व्रत करें।

Mahapadm Kaal Sarp Dosh | महापद्म कालसर्प दोष

छठे भाव में राहु और केतु बारहवे भाव में और इसके बीच सारे ग्रह अवस्थित हों तो महापद्म कालसर्प दोष बनता है।

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Mahapadm Kaal Sarp Dosh

इस योग में जातक शत्रु विजेता होता है, विदेशों से व्यापार में लाभ कमाता है। लेकिन बाहर ज्यादा रहने के कारण उसके घर में शांति का अभाव रहता है। इस योग के जातक को एक ही वस्तु प्राप्त होती है धन या सुख।

इस योग के कारण जातक यात्रा बहुत करता है उसे यात्राओं में सफलता भी प्राप्त होती है। परन्तु कई बार अपनो द्वारा धोखा खाने के कारण उसके मन में निराशा की भावना जागृत हो जाती है।

वह अपने मन में शत्रुता पालकर रखने वाला भी होता है। जातक का चरित्र भी बहुत संदेहास्पद हो जाता है। इसके कारण धर्म की हानि होती है।

वह समय-समय पर बुरा स्वप्न देखता है। उसकी वृध्दावस्था कष्टप्रद होती है। इतना सब कुछ होने के बाद भी जातक के जीवन में एक अच्छा समय आता है।

वह एक अच्छा दलील देने वाला वकील अथवा राजनीति के क्षेत्र में सफलता पाने वाला नेता होता है।

Mahapadm Kaal Sarp Dosh Upay | महापद्म कालसर्प दोष के उपाय

  • श्रावणमास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।
  • शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से शनिवार व्रत आरंभ करना चाहिए। यह व्रत 8 बार करें। काला वस्त्रा धारण करे ॥ 8 या 3 राहु बीज मंत्र की माला जपें।
  • इलाहाबाद (प्रयाग) में संगम पर नाग-नागिन को विधिवत पूजन कर दूध के साथ संगम में प्रवाहित करें एवं तीर्थराज प्रयाग में संगम स्थान में तर्पण श्राध्द भी एक बार अवश्य करें।
  • मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड का 108 बार पाठ श्रध्दापूर्वक करें।

Takshak Kaal Sarp Dosh | तक्षक कालसर्प दोष

केतु लग्न में और राहु सप्तम स्थान में हो तो तक्षक नामक कालसर्प दोष बनता है। कालसर्प योग की शास्त्रीय परिभाषा में इस प्रकार का अनुदित योग परिगणित नहीं है।

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Takshak Kaal Sarp Dosh

लेकिन व्यवहार में इस प्रकार के योग का भी संबंधित जातकों पर अशुभ प्रभाव पड़ता देखा जाता है। इस योग से पीड़ित जातकों को पैतृक संपत्ति का सुख नहीं मिल पाता।

या तो उसे पैतृक संपत्ति मिलती ही नहीं और मिलती है तो वह उसे किसी अन्य को दान दे देता है, अथवा बर्बाद कर देता है।

ऐसे जातक प्रेम प्रसंग में भी असफल्र होते देखे जाते हैं। गुप्त प्रसंगों में भी उन्हें धोखा खाना पड़ता है। वैवाहिक जीवन सामान्य रहते हुए भी कभी-कभी संबंध इतना तनावपूर्ण हो जाता है, कि अलगाव की नौबत आ जाती है।

अपने घर के अन्य सदस्यों की भी यथेष्ट सहानुभूति उन्हें नहीं मिल्र पाती। साझेदारी में उसे नुकसान होता है तथा समय-समय पर उसे शत्रू और षड़यंत्रों का शिकार बनना पड़ता है।

जुए, सट्टे व लॉटरी की प्रवृत्ति उस पर हावी रहती है जिससे वह बर्बादी के कगार पर पहुंच जाता है।

संतानहीनता अथवा संतान से मिलने वाली पीड़ा उसे निरंतर क्लेश देती रहती है। उसे गुप्तरोग की पीड़ा भी झेलनी पड़ती है।

किसी को दिया हुआ धन भी उसे समय पर वापस नहीं मिलता। यदि जातक अपने जीवन में एक बात करें कि अपनी भलाई न सोच कर ओरों का भी हित सोचना शुरु कर दें।

साथ ही अपने मान-सम्मान के कारण दूसरों को नीचा दिखाना छोड़ दें तो उपरोक्त समस्याएं नहीं आती।

Takshak Kaal Sarp Dosh Dosh Upay | तक्षक कालसर्प दोष के उपाय

  • कालसर्प दोष निवारण यंत्र घर में स्थापित करे, एवं नियमित पूजन करें।
  • सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं। जिससे जातक को लाभ मिलेगा और मन में शांति आएगी।

Karkotak Kaal Sarp Dosh | कर्कोटक कालसर्प दोष

केतु दूसरे स्थान में और राहु अष्टम स्थान में हो तब कर्कोटक कालसर्प दोष बनता है।

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Karkotak Kaal Sarp Dosh

जैसा कि हम इस बात को पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं, ऐसे जातकों के भाग्योदय में इस योग की वजह से कुछ रुकावटे अवश्य आती हैं।

उनको नौकरी मिलने व पदोन्नति होने में भी कठिनाइयां आती हैं। कभी-कभी तो उन्हें बड़े ओहदे से छोटे ओहदे पर काम करने का भी दंड भुगतना पड़ता है।

पैतृक संपत्ति से भी ऐसे जातकों को मनोकूल लाभ नहीं मिल पाता है। व्यापार में भी समय-समय पर क्षति होती रहती है।

कोई भी काम बढ़िया से चल नहीं पाता। कठिन परिश्रम के बावजूद उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

मित्रों से धोखा मिलता है तथा शारीरिक रोग व मानसिक परेशानियों से व्यथित जातक को अपने कुटुंब व रिश्तेदारों के बीच भी सम्मान नहीं मिलता।

चिड़चिड़ा स्वभाव व मुंहफट बोली के कारण से उसे कई झगड़ों में फंसना पड़ता है। उधार दिया पैसा भी डूब जाता है। शत्रू षड़यंत्र व अकाल मृत्यु का जातक को बराबर भय बना रहता है।

Karkotak Kaal Sarp Dosh Upay | कर्कोटक कालसर्प योग दोष के उपाय

  • हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें और पांच मंगलवार का व्रत करते हुए हनुमान जी को चमेली के तेल में घुला सिंदूर व बूंदी के लड्डू चढ़ाएं। काल सर्प दोष निवारण यंत्र घर में स्थापित कर प्रतिदिन पूजन करें।
  • शनिवार को कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना मुंह देख एक सिक्का अपने सिर पर तीन बार घुमाते हुए तेल में डाल दें। उस कटोरी को किसी गरीब आदमी को दान दे दें अथवा पीपल की जड़ में चढ़ा दें।
  • सवा महीने तक जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं और प्रत्येक शनिवार को चींटियों को शक्कर मिश्रित सत्तू बिलो पर डालें।
  • अपने सोने वाले कमरे में लाल रंग के पर्दे, चादर व तकियों का प्रयोग करें। जिससे जातक को बहुत लाभ मिलता है।

Shanknaad / Shankhchood Kaal Sarp Dosh | शंखनाद / शंखचूड़ कालसर्प दोष

केतु तीसरे स्थान में व राहु नवम स्थान में शंखनाद / शंखचूड़ कालसर्प दोष बनता है। इस योग से पीड़ित का भाग्योदय होने में अनेक प्रकार की अड़चने आती रहती हैं।

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Shanknaad / Shankhchood Kaal Sarp Dosh

व्यावसायिक प्रगति, नौकरी में पदोन्नति तथा पढ़ाई-लिखाई में वांछित सफलता मिलने में कई प्रकार के विघ्नों का सामना करना पड़ता है।

इसके पीछे कारण जातक स्वयं होता है, क्योंकि वह अपनो का भी हिस्सा छिनना चाहता है। अपने जीवन में धर्म से खिलवाड़ करता है। साथ ही इसके अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण यह सारी समस्या उसे झेलनी पड़ती है।

अधिक सोच के कारण शारीरिक व्याधियां भी उसका पीछा नहीं छोड़ती। इन सब कारणों के कारण सरकारी मकहमों व मुकदमेंबाजी में भी धन खर्च होता रहता है।

उसे पिता का सुख तो बहुत कम मिलता ही है, वह ननिहाल व बहनोड़यों से भी छला जाता है। मित्र भी धोखाबाजी करने से बाज नहीं आते।

वैवाहिक जीवन आपसी वैमनस्यता की भेंट चढ़ जाता है। उसे हर बात के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है। उसे समाज में यथेष्ट मान-सम्मान भी नहीं प्राप्त होता है।

उक्त परेशानियों से बचनेको लिए उसे अपनों को अपनाना पड़ेगा, अपनो से प्यार करना होगा, धर्म की राह पर चलना होगा एवं मुंह में राम बगल में छूरी की भावना को त्यागना होगा।

तब जाकर जीवन में बहुत कम कठीनाइयों का सामना करना पड़ेगा। तब भी कठिनाईयां आति हैं तो निम्नलिखित
उपाय बड़े लाभप्रद सिध्द होते हैं।

Shanknaad / Shankhchood Kaal Sarp Dosh Upay | शंखनाद / शंखचूड़ कालसर्प योग दोष के उपाय

  • महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करें और श्रावण महीने के हर सोमवार का व्रत रखते हुए शिव का रुद्राभिषेक करें।
  • चांदी या अष्टधातुक के नाग बनाकर उसकी अंगूठी हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करें। किसी शुभ मुहुर्त में अपने घर के मुख्य दरवाजे पर चांदी का स्वस्तिक एवं दोनों ओर धातु से निर्मित नाग चिकपा दें।

Ghatak Kaal Sarp Dosh | घातक कालसर्प दोष

केतु चतुर्थ तथा राहु दशम स्थान में हो तो घातक कालसर्प दोष बनाते हैं। इस योग में उत्पन्न जातक यदि माँ की सेवा करे तो उत्तम घर व सुख की प्राप्ति होता है।

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Ghatak Kaal Sarp Dosh

जातक हमेशा जीवन पर्यन्त सुख के लिए प्रयत्नशील रहता है। उसके पास कितना ही सुख आ जाये उसका मन नहीं भरता है। उसे पिता का भी विछोह झेलना पड़ता है।

वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं रहता। व्यवसाय के क्षेत्र में उसे अप्रत्याशित समस्याओं से मुकाबला करना पड़ता है। परन्तु व्यवसाय व धन की कोई कमी नहीं होती है।

नौकरी पेशा वाले जातको को सस्पेंड, डिस्चार्ज या डिमोशन के खतरों से सामना करना पड़ता है। साझेदारी के काम में भी मनमुटाव व घाटा क्लेश पहुंचाते रहते हैं।

सरकारी पदाधिकारी भी उससे खुश नहीं रहते और मित्र भी धोखा देते रहते हैं। यदि यह जातक रिश्वतखोरी व दो नम्बर के काम से बाहर आ जाएं तो जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती हैं।

सामाजिक प्रतिष्ठा उसे जरूर मिलती है, साथ ही राजनैतिक क्षेत्र में बहुत सफलता प्राप्त करते है। उक्त परेशानियों से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय कर लाभ उठा सकते हैं।

Ghatak Kaal Sarp Dosh Upay | घातक कालसर्प योग दोष के उपाय

  • नित्य प्रति हनुमान चालीसा का पाठ करें व प्रत्येक मंगलवार का व्रत रखें और हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर घोलकर चढ़ाएं तथा बूंदी के लड्ड़ू का भोग लगाएं।
  • एक वर्ष तक गणपति अथर्वशीर्षक का नित्य पाठ करें।
  • शनिवार का व्रत रखें, श्री शनिदेव का तैलाभिषेक व पूजन करें। जिससे जातक को बहुत लाभ मिलता है।
  • सोमवार के दिन व्रत रखें, भगवान शिव के मंदिर में चांदी के नाग की पूजा कर अपने पितरों का स्मरण करें और उस नाग को बहते जल में श्रध्दापूर्वक विसर्जित कर दें।

Vishdhar ( Vishakt ) Kaal Sarp Dosh | विषधर (विषाक्त) कालसर्प दोष

यदि केतु पंचम और राहु ग्यारहवे भाव में हो तो विषधर कालसर्प दोष बनाते हैं। जातक को ज्ञानार्जन करने में आंशिक व्यवधान उपस्थित होता है।

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Vishdhar ( Vishakt ) Kaal Sarp Dosh

उच्च शिक्षा प्राप्त करने में थोड़ी बहुत बाधा आती है एवं स्मरण शक्ति का प्राय: हास होता है। जातक को नाना-नानी, दादा-दादी से लाभ की संभावना होते हुए भी नुकसान उठाना पड़ता है।

चाचा, चचेरे भाइयों से कभी-कभी मतान्तर या झगड़ा- झंझट भी हो जाता है। बड़े भाई से विवाद होनेक की प्रबल संभावना रहती है।

इस योग के कारण जातक अपने जन्म स्थान से बहुत दूर निवास करता है या फिर एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करता रहता है।

लेकिन कालान्तर में जीवन में स्थायित्व भी आता है। लाभ मार्ग में थोड़ा बहुत व्यवधान उपस्थित होता रहता है। वह व्यक्ति कभी-कभी बहुत चिंतातुर हो जाता है।

धन सम्पत्ति को लेकर कभी बदनामी की स्थिति भी पैदा हो जाती है या कुछ संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। उसे सर्वत्र लाभ दिखलाई देता है पर लाभ मिलता नहीं। संतान पक्ष से थोड़ी-बहुत परेशानी घेरे रहती है।

कई प्रकार की शारीकिर व्याधियों से भी कष्ट उठाना पड़ता है। उसके जीवन का अंत प्राय: रहस्यमय ढंग से होता है। उपरोक्त परेशानी होने पर निम्नलिखित उपाय करें।

Vishdhar ( Vishakt ) Kaal Sarp Dosh Upay | विषधर (विषाक्त) कालसर्प योग दोष के उपाय

  • श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें जिससे दोष शांत होगा।
  • सोमवार को शिव मंदिर में चांदी के नाग की पूजा करें, पितरों का स्मरण करें तथा श्रध्दापूर्वक बहते पानी या समुद्र में नागदेवता का विसर्जन करें।
  • प्रत्येक सोमवार को दही से भगवान शंकर पर ‘ओउम्‌ हर हर महादेव’ कहते हुए अभिषेक करें। ऐसा हर रोज श्रावण के महिने में करें।
  • सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं ।

Sheshnag Kaal Sarp Dosh | शेषनाग कालसर्प दोष

कुंडली में केतु छठे और राहु बारहवे भाव में हो तथा इसके बीच सारे ग्रह आ जाये तो शेषनाग कालसर्प दोष बनता है।

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Sheshnag Kaal Sarp Dosh

शास्त्राणेक्त परिभाषा के दायरे में यह योग परिगणित नहीं है, किंतु व्यवहार में लोग इस दोष संबंधी बाधाओं से पीड़ित अवश्य देखे जाते हैं।

पीड़ित जातको की मनोकामनाये हमेशा विलंब से ही पूरी होती हैं। अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अपने जन्मस्थान से दूर जाना पड़ता है।

शत्रु षड़यंत्रों से उसे हमेशा वाद-विवाद व मुकदमे बाजी में फंसे रहना पड़ता है। उनके सिर पर बदनामी की कटार हमेशा लटकी रहती है।

शारीकिर व मानसिक व्याधियों से अक्सर व्यथित होना पड़ता है और मानसिक उद्विग्नता की वजह से वह ऐसी अनाप-शनाप हकरतें करता है कि लोग उसे आश्चर्य की दृष्टि से देखने लगते हैं।

लोगों की नजर में जीवन बहुत रहस्यमय बना रहता है। जातक का काम करने का ढंग भी निराला होताहै। वह खर्च भी आमदनी से अधिक किया करता है।

फलस्वरूप वह हमेशा लोगों का देनदार बना रहता है, और कर्ज उतारने के लिए उसे जी तोड़ मेहनत करनी पड़ती है।

जीवन में एक बार अच्छा समय भी आता है जब उसे समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त होता है और मरणोपरांत उसे विशेष ख्याति प्राप्त होती है।

इस योग की बाधाओं से पार पाने के लिए यदि निम्नलिखित उपाय किये जायें तो जातक को बहुत लाभ मिलता है।

Sheshnag Kaal Sarp Dosh Upay | शेषनाग कालसर्प दोष के उपाय

  • किसी शुभ मुहूर्त में ओम्‌ नम: शिवाय’ की 4 माला जाप करने के उपरांत शिवलिंग का गाय के दूध से अभिषेक करें और शिव को प्रिय बेलपत्र आदि सामग्रियां श्रध्दापूर्वक अर्पित करें। साथ ही तांबे का बना सर्प विधिवत पूजन के उपरांत शिवलिंग पर समर्पित करें।
  • हनुमान चालीसा का 80 बार पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान जी की प्रतिमा पर लाल वस्त्रा सहित सिंदूर, चमेली का तेल व बताशा चढ़ाएं।
  • सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाने के बाद ही कोई काम प्रारंभ करें दोष शांत होगा।
  • शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर अष्टधातु या चांदी का स्वस्तिक लगाएं और उसके दोनों ओर धातु निर्मित नाग जड़े।

काल सर्प दोष शांति के लिए त्रम्ब्केश्वर अत्यधिक महत्ता है। स्थान की अधिक जानकारी के लीये Wikipedia link Trimbakeshwar फॉलो कर सकते है।

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