One-Sidedness Vs Many-sidedness

कई अर्थो में यह सही भी है, किन्तु अनेकांतवाद को एकान्तवाद का मात्र विपरीत शब्द (One-Sidedness Vs Many-sidedness) मान लेना पूर्ण रूप से सही नहीं है। स्याद्वाद और अनेकांतवाद को एक दूसरे का पर्याय भी माना जाता है।…

Continue ReadingOne-Sidedness Vs Many-sidedness

Debrief the Syadvada Theory | स्यादवाद

जैन परंपरा में स्याद्वाद (Syadvada) अथवा अनेकांतवाद (Many-Sidedness) का प्रमुख स्थान है। यदि कहा जाये की जैन धर्म के मूल सिद्धांतो का उदय अनेकांतवाद के गर्भ से ही हुआ है, तो किंचित भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस सिद्धांत…

Continue ReadingDebrief the Syadvada Theory | स्यादवाद

Debate on Syadvada | स्यादवाद दोष परिहार

स्याद्गाद का क्‍या अर्थ है व उसका दर्शन के क्षेत्र में कितना महत्त्व है, यह दर्शाने के लिये इस पर आने वाले कुछ आरोपों का निराकरण (Debate on Syadvada) करना चाहते हैं। स्याद्वाद के वास्तविक अर्थ से अपरिचित…

Continue ReadingDebate on Syadvada | स्यादवाद दोष परिहार

Gaslighting symptoms and precautions

जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रिश्ते में होते हैं, जिसे आप अपने आप से भी अधिक प्रेम करते हैं, तो आखिरी चीज जिसकी आप उम्मीद करते हैं, वह है भी आपको आपके समान ही प्रेम करे। …

Continue ReadingGaslighting symptoms and precautions

Gaslighting side effects | दुष्प्रभाव

कोई व्यक्ति लम्बे समय तक गैसलाइटिंग का शिकार होता है। तब उसके दुष्प्रभाव (Gaslighting side effects) उसके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगते है।  अक्सर पीड़ित व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को लेकर ही भ्रमित रहने लगता है। उसके…

Continue ReadingGaslighting side effects | दुष्प्रभाव

What is Gaslighting | गैसलाइटिंग

गैसलाइटिंग (Gaslighting) मनोवैज्ञानिक तरीके से हेरफेर का एक रूप है, जिसमें कोई एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के मन में आत्म-संदेह एवं  भ्रम उत्पन्न करने का प्रयास करता है। जिसके कारण उस व्यक्ति को यह महसूस होने लगता है…

Continue ReadingWhat is Gaslighting | गैसलाइटिंग

Doctrines of jainism | मूल जैन सिद्धांत

जैन धर्म की उत्पत्ति के साथ ही भारतीय धर्म दर्शन में शरीर एवं आत्मा के एक दुसरे से पूर्णता अलग होने के सिद्धांत की अवधारणा का जन्म हुआ।  जैन धर्म (Doctrines of jainism) मुख्यतः आपको अपनी सांसारिक एवं…

Continue ReadingDoctrines of jainism | मूल जैन सिद्धांत

24 Teerthankar | चौबीस तीर्थंकर

प्रत्येक उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल में 24-24 तीर्थंकर (24 Teerthankar) होते हैं। भरत क्षेत्र में प्रत्येक अवसर्पिणी और उत्तसर्पिणी के कर्म-काल में 24-24 तीर्थकर होते हैं। वैसे तो अभी तक अनन्त काल (अवसर्पिणी व उत्सर्पिणी) बीत चुके हैं…

Continue Reading24 Teerthankar | चौबीस तीर्थंकर

Philosophy behind Teerthankar | तीर्थंकर

आध्यात्मिक साधना कर जीवन को परम पवित्र और मुक्त बनाया जा सकता है। सारांश यह है कि तीर्थकरत्व के गौरव से युक्त वे महापुरूष होते हैं, जो समस्त विकारों पर विजय पाकर जिनत्व को प्राप्त कर लेते हैं।…

Continue ReadingPhilosophy behind Teerthankar | तीर्थंकर

24 Teerthankar Introduction

जैन धर्म के अनुसार प्रत्येक काल चक्र में अवसर्पिणी के सुषमा-दुषमा नामक तीसरे काल के अन्त में और उत्सर्पिणी के दुषमा-सुषमा नामक चौथे काल के प्रारंभ में जब यह सृष्टि भोगयुग से कर्मयुग में प्रविष्ट होती है, तब…

Continue Reading24 Teerthankar Introduction